१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)
108 Upanishads Part 2 - Gyan Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१९४ छान्दोग्योपनिषद् तानि वा एतानि सामान्येतः सामवेदमभ्यतपंस्तस्याभितप्तस्य यशस्तेज इन्द्रियं वीर्यमन्नाद्यः रसोजायत ॥ २ ॥ उन साम मंत्रों ने सामवेद को अभितप्त किया। उस अभितपन से यश, तेजस्, इन्द्रिय शक्ति, पराक्रम और अन्नादि रूप रस उत्पन्न हुए ॥ २ ॥ तद्यक्षरत्तदादित्यमभितोऽश्रयत्तद्वा एतद्यदेतदादित्यस्य परं कृष्णःरूपम् ॥ ३ ॥ वह रस विशेष रूप से क्रियाशील हुआ और आदित्य के पश्चिमी भाग में आश्रित हुआ। यह जो आदित्य का कृष्ण रूप है, यह वही है ॥ ३ ॥ ॥ चतुर्थः खण्डः ॥ अथ येऽस्योदञ्चो रश्मयस्ता एवास्योदीच्यो मधुनाड्योऽथर्वाङ्गिरस एव मधुकृत इतिहासपुराणं पुष्पं ता अमृता आपः ॥ १ ॥ इस आदित्य की जो उत्तरी भाग की किरणें हैं, वे ही इसकी उत्तर दिशा की मधु नाड़ियाँ हैं, अथर्व-मन्त्र ही मधु मक्खियाँ हैं। इतिहास-पुराण ही पुष्प हैं। (सोमादि रूप) अमृत ही जल है ॥१ ॥ ते वा एतेऽथर्वाङ्गिरस एतदितिहासपुराणमभ्यतपंस्तस्याभितप्तस्य यशस्तेज इन्द्रियं वीर्यमन्नाद्यःरसोजायत ॥ २ ॥ उन अथर्व मन्त्रों ने इतिहास-पुराण आदि को अभितप्त किया। उस अभितपन से यश, तेजस्, इन्द्रिय शक्ति, पराक्रम और अन्नादि रूप रस उत्पन्न हुए ॥ २ ॥ तद्यक्षरत्तदादित्यमभितोऽश्रयत्तद्वा एतद्यदेतदादित्यस्य परं कृष्णः रूपम् ॥ ३ ॥ वह रस विशेष रूप से क्रियाशील हुआ और आदित्य के उत्तर भाग में आश्रित हुआ। यह जो आदित्य का अत्यन्त कृष्ण रूप है, यह वही है ॥ ३ ॥ ॥ पञ्चमः खण्डः ॥ अथ येऽस्योर्ध्वा रश्मयस्ता एवास्योर्ध्वा मधुनाड्यो गुह्या एवादेशा मधुकृतो ब्रह्मैव पुष्पं ता अमृता आपः ॥ १ ॥ इस आदित्य की जो ऊपर की ओर की रश्मियाँ हैं, यही ऊपर की मधु नाड़ियाँ हैं। गुह्य (अदृश्य) आदेश ही मधुकर हैं, ब्रह्म ही पुष्प है तथा (सोमादि रूप) अमृत ही जल है ॥ १ ॥ ते वा एते गुह्या आदेशा एतद्ब्रह्माभ्यतपंस्तस्याभितप्तस्य यशस्तेज इन्द्रियं वीर्यमन्नाद्यः रसोजायत ॥ २ ॥ उन गुह्य आदेशों ने ही ब्रह्म को अभितप्त किया। उस अभितपन से यश, तेजस्, इन्द्रिय शक्ति, पराक्रम और अन्नादिरूप रस उत्पन्न हुए ॥ २ ॥ [ पदार्थ विज्ञान आदित्यादि की सक्रियता के पीछे पदार्थ कणों की सक्रियता को कारण मानता है। ऋषि कहते हैं कि आदित्यादि की जो दृश्य प्रक्रिया चल रही है, उसके पीछे चेतन का संकल्प या आदेश कार्य कर रहा है। कम्प्यूटर सारे कार्य करता दिखता है, किन्तु कम्प्यूटर वैज्ञानिक जानता है कि उस सारी प्रक्रिया के मूल में कम्प्यूटर को दिया गया निर्देश (कमाण्ड) ही उसकी सक्रियता का कारण है। उसी प्रकार ऋषि इस विश्व ब्रह्माण्ड के पीछे कोई गुप्त निर्देश होना मानते हैं। उसे ही उन्होंने दृश्य रसों का भी रस कहा है।]