भारतकोश
१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)

१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)

108 Upanishads Part 2 - Gyan Khand

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished505 पृष्ठ

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संकेत विवरण


अक्षि० - अक्ष्युपनिषद्तै०ब्रा० - तैत्तिरीय ब्राह्मणमुक्ति० - मुक्तिकोपनिषद्
अथर्व० - अथर्ववेदतै० सं० - तैत्तिरीय संहितामुण्ड० - मुण्डकोपनिषद्
अध्या० - अध्यात्मोपनिषद्त्रि०म० - त्रिपाद्विभूति-महानारायणोपनिषद्मुद्र० - मुद्रलोपनिषद्
अ०पू० - अन्नपूर्णोपनिषद्त्रि०ता० - त्रिपुरा तापिन्युपनिषद्मैत्रा० - मैत्रायण्युपनिषद्
अमृ० - अमृतनादोपनिषद्दे०भा० - देवी भागवतमैत्रे० - मैत्रेय्युपनिषद्
अव्य० - अव्यक्तोपनिषद्द्र० - द्रष्टव्यमै०ब्रा० - मैत्रायणी ब्राह्मण
अ०शिर० - अथर्वशिरोपनिषद्ध्या० बि० - ध्यानबिन्दूपनिषद्यजु० - यजुर्वेद
अष्टा० - अष्टाध्यायीना०प० - नारदपरिव्राजकोपनिषद्या० स्मृ० - याज्ञवल्क्य स्मृति
आत्मो० - आत्मोपनिषद्ना०पु० - नारदीय पुराणयो०कु० - योगकुण्डल्युपनिषद्
आ०बो० - आत्मबोधोपनिषद्ना०बि० - नादबिन्दूपनिषद्यो० चू० - योगचूडामण्युपनिषद्
आरु० - आरुणिकोपनिषद्नारा० - नारायणोपनिषद्यो० त० - योगतत्त्वोपनिषद्
आश्र० - आश्रमोपनिषद्निरा० - निरालम्बोपनिषद्यो०द० - योगदर्शन
आ०श्रौ० - आश्वलायन श्रौतसूत्रनिरु० - निरुक्तयो०शि० - योगशिखोपनिषद्
ईश० - ईशावास्योपनिषद्नृ०उ० - नृसिंहोत्तरतापिन्युपनिषद्रा०उ० - रामोत्तरतापिन्युपनिषद्
ऋ० - ऋग्वेदन्या०द० - न्याय दर्शनरा०मा० - रामचरित मानस
एका० - एकाक्षरोपनिषद्पंच० - पंचदशीरा०र० - राम रहस्योपनिषद्
ऐत० - ऐतरेयोपनिषद्पं० ब्र० - पंच ब्रह्मोपनिषद्वाच० - वाचस्पत्यम्
ऐ०ब्रा० - ऐतरेय ब्राह्मणप०प० - परमहंस-परिव्राजकोपनिषद्वा०रा० - वाल्मीकि रामायण
कठ० - कठोपनिषद्प०पु० - पद्मपुराणवि०चू० - विवेक चूडामणि
क०रु० - कठनरुद्रोपनिषद्पैंग० - पैंगलोपनिषद्वे०परि० - वेदान्त परिभाषा
कलिसं० - कलिसंतरणोपनिषद्प्रण० - प्रणवोपनिषद्वे०सा० - वेदान्त सार
काठ०सं० - काठक संहिताप्रश्न० - प्रश्नोपनिषद्वै०द० - वैशेषिक दर्शन
का०श्रौ० - कात्यायन श्रौतसूत्रबहु० - बह्वृचोपनिषद्शत०ब्रा० - शतपथ ब्राह्मण
कु०सं० - कुमार संभवबृह० - बृहदारण्यकोपनिषद्शब्द० - शब्दकल्पद्रुम
कृष्ण० - कृष्णोपनिषद्ब्र०बि० - ब्रह्मबिन्दूपनिषद्शां० प० - शांतिपर्व
केन० - केनोपनिषद्ब्र०वै०पु० - ब्रह्मवैवर्तपुराणशि०सं० - शिवसंकल्पोपनिषद्
कौ०ब्रा० - कौषीतकि ब्राह्मणोपनिषद्ब्र०सू० - ब्रह्मसूत्रशु०र० - शुकरहस्योपनिषद्
गाय० - गायत्र्युपनिषद्ब्रह्म० - ब्रह्मोपनिषद्श्वेता० - श्वेताश्वतरोपनिषद्
गी० - श्रीमद्भगवद्गीताब्रह्मा०पु० - ब्रह्माण्ड पुराणषड्०ब्रा० - षड्विंश ब्राह्मण
गो०उ० - गोपालोत्तरतापिन्युपनिषद्भा० पु० - भागवत पुराणसंन्या० - संन्यासोपनिषद्
गो० ब्रा० - गोपथ ब्राह्मणमन्त्रि० - मन्त्रिकोपनिषद्संहि० - संहितोपनिषद्
चा०नी० - चाणक्य नीतिम०स्मृ० - मनु स्मृतिस०सा० - सर्वसारोपनिषद्
छान्दो० - छान्दोग्योपनिषद्महा० - महाभारतसां०द० - सांख्यदर्शन
जाबा० - जाबालोपनिषद्महाना० - महानारायणोपनिषद्सुं० कां० - सुंदरकांड
जैमि० - जैमिनीGeneralमहो० - महोपनिषद्सूर्यो० - सूर्योपनिषद्
जै० ब्रा० - जैमिनीय ब्राह्मणमाण्डू० - माण्डूक्योपनिषद्स्कं० - स्कंदोपनिषद्
ते०बि० - तेजोबिन्दूपनिषद्मी० द० - मीमांसा दर्शनस्कं० पु० - स्कन्दपुराण
तै०आ० - तैत्तिरीय आरण्यकह०को० - हलायुध कोश
तैत्ति० - तैत्तिरीयोपनिषद्ह० प्र० - हठयोग प्रदीपिका