१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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हो जाता है। मणिबन्ध (कलाई) और गुल्फ (टखना) का स्फुरण बन्द हो जाने पर छै महीने तक जीवित रहता है। जब कोहनी में स्फुरण न हो तो जीवन की अवधि तीन मास रह जाती है। यदि कुक्षि, उपस्थेन्द्रिय में स्फुरण न हो तो एक महीने में और नेत्रों में स्फुरण न हो तो पन्द्रह दिन में जीवन का अन्त हो जाता है। जठर द्वार पर स्फुरण न होने से जीवन की अवधि दस दिन रह जाती है और ज्योति जुगनू के समान हो जाय तो पांच दिन ही शेष रह जाते हैं। अगर जिह्वा दिखलाई पड़नी बन्द हो जाय तो तीन दिन का समय समझना चाहिये। ये सब अनिष्ट आयु के क्षय के कारण रूप हैं।" —त्रिशिख ब्राह्मण उपनिषद् "हृदय स्थान में अष्टदल कमल है। वही ऐसा सोचता है कि मैं सब कर्मों का कर्त्ता, भोक्ता, सुखी, दुखी, काना, बहिरा, दुबला, मोटा आदि हूँ। उसमें जीवात्मा ज्योति रूप अणुमात्र में रहता है। उसी में सब कुछ प्रतिष्ठित है। उस कमल का पूर्व दल श्वेत वर्ण का है। उसमें निवास करने से भक्ति और धर्म में मति रहती है। जब आग्नेय दिशा के रक्तवर्ण दल में निवास होता है तब निद्रा और आलस्य में मति होती है। दक्षिण वाले कृष्ण दल में निवास होने पर द्वेष और कोप में मति होती है। नैऋत दिशा के नीलवर्ण दल में निवास करता है तब पापकर्म और हिंसा में मति रहती है। जब पश्चिम में स्फटिक वर्ण वाले दल में निवास करता है तब क्रीड़ा, विनोद में मति होती है। जब वायव्य कोण के माणिक्य रंग वाले दल में निवास करता है तब चलने और वैराग्य की भावना होती है। जब उत्तर के पीतवर्ण दल में निवास करता है तब सुख, श्रृङ्गार