भारतकोश
१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ

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रुद्राक्षजाबालोपनिषत् ] [ ३२३ जाते हैं । जो मध्याह्न, ( दोपहर ) में पढ़ता है, उसके छः जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं । प्रतिदिन प्रातः सायं पढ़ने से अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं तथा छः हजार लाख गायत्री जप के फल को प्राप्त करता है एवं ब्रह्महत्या, सुरापान ( शराब पीना ) सोना चुराना, गुरु की पत्नी से सम्भोग करना, आदि २ पापों के करने पर भी पवित्र हो जाता है तथा सभी तीर्थों के फल को प्राप्त करता है । नीचों से बातचीत करने पर जो पाप लगता है अथवा पुण्यक्षय होता है, उससे भी छूट जाता है एवं वह सैकड़ों हजारों पंक्तियों को ( अर्थात् बहुत अधिक प्राणियों को ) पवित्र करने वाला हो जाता है तथा शिवजी की समीपता को प्राप्त करता है ( अर्थात् सदा शिव के साथ विहरण करता है ) और कभी फिर जन्ममृत्यु के चक्कर में नहीं फँसता ॥३६॥ ॥ रुद्राक्षजाबालोपनिषद् समाप्त ॥