१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंरामपूर्वतापिन्युपनिषत् ] [ ३३७ ही आठ दल वाला कमल बनावे । कमल की केसर में दो-दो अक्षर के क्रमपूर्वक सब स्वर वर्णों को लिखना चाहिए । कमल के आठ दलों में छः छः वर्ण के क्रम से उल्लेख करे । माला-मन्त्र के सैंतालीस वर्ण पूरे करने के लिए आठवें दल में पांच वर्ण ही रह जायेंगे । ऊपर बताये ढङ्ग से पुनः एक कमल बनाकर उसकी आठों पंखुड़ियों पर 'ॐ नमो नारायण' मन्त्र के एक-एक अक्षर को लिखे, उसके केसर में श्री लिखे । उसके ऊपर बारह पंखड़ियों का कमल बनाकर उसकी प्रत्येक पंखुड़ी पर द्वादशाक्षर मन्त्र का एक-एक अक्षर लिखना चाहिए ॥४०-४७॥ आदिक्षान्तान्केसरेषु वृत्ताकारेण संलिखेत् । तद्वहिः षोडशदलं लिख्य तत्केसरे ह्रियप्र । वर्मस्त्रिनतिसंयुक्तं दलेषु द्वादशाक्षरम् । तत्सन्धिष्विरजादीनां मन्त्रान्मन्त्री समालिखेत् ॥ ४८ हं सं भ्रं वं लूं श्रं ञं च लिखेत्सम्यक्ततो वहिः । द्वात्रिंशारं महापद्मं नादबिन्दुसमायुतम् ॥ ५० विलिखेन्मन्त्रराजाणांस्तेषु दात्रेषु यत्नतः । ध्यायेदष्टवसूनेकादशरुद्रांश्च तत्र वै ॥ ५१ द्वादशेनांश्च धातारं वषट्कारं च तद्बहिः । भूपृहं वज्रशूलाढ्यं रेखात्रयसमन्वितम् ॥ ५२ द्वारोपेतं च राश्यादिभूषितं फणिसंयुतम् । अनन्तो वासुकिश्चैव तक्षः कर्को पद्मऋः ॥ ५३ महापद्मश्च शङ्खश्च गुलिकोऽष्टौ प्रकीर्त्तिताः । एवं मण्डलमालिख्य तस्य दिक्षु विदिक्षुच ॥ ५४