१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३३६ ] [ रामपूर्वतापिन्युपनिषत्
कुरु द्वयं च तत्पार्श्वे लिखेद्बीजान्तरे रमाम् । तत्सर्वं प्रणवाभ्यां च वेष्टयेच्छुद्धबुद्धिमान् ॥ ४२ दीर्घभाजि षडस्रे तु लिखेद्बीजं हृदादिभिः । कोणपार्श्वे रमामाये वदग्रेऽनङ्गमालिखेत् ॥ ४३ क्रोधं कोणाग्रान्तरेषु लिख्य मन्त्र्यभितो गिरम् । वृत्तत्रयं साष्टपत्रं सरोजे विलिखेत्स्वरान् ॥ ४४ केसरे चाष्टपत्रे च वर्गाष्टकमथालिखेत् । तेषु मालामनोर्वर्णान्विलिखेदूर्भिसंख्यया ॥ ४५ अन्ते पञ्चाक्षराण्येष्वं पुनरष्टदलं लिखेत् । तेषु नारायणाष्टार्णाँल्लिख्य तत्केसरे रमाम् ॥ ४६ तद्बहिर्द्वादशदलं विलिखेद्द्वादशाक्षरम् । अथोंनमो भगवते बासुदेवाय इत्ययम् ॥ ४७
पूजा यन्त्र का संक्षिप्त वर्णन किया गया । अब उसका निर्देश करते हैं । सम रेखाओं के दो त्रिकोण बनाकर उनके बीच में पृथक्-पृथक् प्रणव लिखे, फिर उन दोनों के मध्य में आद्यबीज लिखे और उसके नीचे जो कार्य सिद्ध करना है, उसका उल्लेख करे । साध्य का नाम द्वितीयान्त हो और आद्यबीज के शीर्ष भाग में साधक का नाम षष्ट्यन्त रहे । फिर बीज के इधर-उधर एक-एक कुरुपद का उल्लेख करे । बीज के मध्य भाग में तथा साध्य के ऊपर श्री लिखे । यह सब इस प्रकार लिखने चाहिये कि वे दोनों प्रणवों में सम्पुटित रहें । तत्पश्चात् छहों कोणों में दीर्घ स्वर वाले मूल बीज को उल्लिखित करे । फिर एक-एक के साथ हृदयाय नमः और शिर से स्वाहा लिखे । कोणों के बगल में श्रीं, ह्रीं, क्लीं लिखे और कोण के अगले भाग में हुम् और हुम् के दोनों ओर ऐं लिखना चाहिये । इसके पश्चात् तीन वृत्त बनाकर वृत्तों के साथ