१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंरामपूर्वतापिन्युपनिषत् ] [ ३४३ भाग, ऊपर का भाग, अगल-बगल भी पूजन किया जाता है। पीठ के ऊपर बीच में स्थित आठ दल वाले कमल को भी पूजे । रत्न जटिट सिंहासन पर कोमल और चिकनी गद्दी की भावना कर उस पर ईश्वर रूप आचार्य की पूजा करे । पीठ के निचले भाग में, उपास्यदेव के आसन के नीचे आश्रयशक्ति, कूर्म, नाग और पृथ्वीयुक्त दो कमलों की भावना कर, उन सब का पूजन करे । विघ्न, दुर्गा, क्षेत्रपाल और वाणी के साथ आदि में बीज लगाकर नाम के साथ चतुर्थी विभक्ति लगाकर पूजा करे । फिर पीठ के पायों में धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का अग्नि कोण आदि में पूजन कर अधर्म, अनर्थ, अकाम और अमोक्ष को भी पूर्वादि दिशाओं में पूजे । फिर पीठ के ऊपर के मध्य भाग में सूर्य, चन्द्र, अग्नि का पूजन करे । यन्त्र स्थित सत्व, रज तम के प्रतीक बीज सहित तीन वृत्तों का भी चिन्तन एवं पूजन करे । फिर दिशाओं और कोणों में बने हुये कमल के आठ दलों का पूजन करे । इनमें जो दल मध्य स्थित दिशा में है, उनमें आग्नेयकोण से क्रमशः आत्मा, अन्तरात्मा, परमात्मा और ज्ञानात्मा की पूजा करे । पूर्वादि दिशाओं में माया, विद्या, कला और पर इन तत्वों को पूजे । फिर विमला आदि शक्तियों को पूजे । फिर मुख्य देवता का आह्वान और अर्चन करे । फिर अङ्गव्यूहों का पूजन करे और धृष्टि आदि लोकपाल और उनके अस्त्र, वशिष्ठ आदि मुनि फिर नील आदि के साथ चन्दन आदि विभिन्न लेपनों और अलंकारों आदि के द्वारा श्रीराम का पूजन कर जप आदि समर्पित करे । "संसार के आश्रयभूत, गदा, चक्र, शंख, पद्मधारी भव-बन्ध के काटने वाले सच्चिदानन्द स्वरूप और अत्यन्त महिमावान हैं उन परमेश्वर श्रीराम को मैं नमस्कार करता हूँ।" इस प्रकार उनकी स्तुति करे । जो उपासक ऐसा करते हैं, वे मोक्ष को अवश्य प्राप्त करते हैं ।