१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ
पृष्ठ 352, कुल 572 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 352
३४४ ] [ रामपूर्वतापिन्युपनिषत् लीला-संवरण-काल में ही श्रीराम देह सहित अन्तर्ध्यान हो गए । उनके आयुध भी साथ ही अन्तर्ध्यान हो गये। वे अपने स्वाभाविक रूप को धारण कर सीता सहित परमधाम में पहुँच गये । उनके साथ ही उनका सब परिवार, प्रजाजन, विभीषण आदि भी परमधाम में गए। उनके भक्त इच्छित भोगों को प्राप्त करते हैं और उनका उपभोग कर अन्त में परमपद प्राप्त करते हैं। यह ऋचायें सम्पूर्ण अभीष्टों और अर्थों की देने वाली हैं। इनका पाठ करने वाले भक्तजन पवित्र अन्तःकरण वाले होकर मोक्ष को प्राप्त होते हैं ॥ १-१० ॥ ॥ रामपूर्वतापिन्युपनिषद् समाप्त ॥ —:०:—