१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ
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दक्षिणामूर्त्युपनिषत् [ ४०९ कहे गये हैं । ३१ । सृष्टि ( संसार ) की रचना के प्रारम्भ में भगवान् ब्रह्मा, इनकी उपासना करके सृष्टि निर्माण की शक्ति को पाकर तथा अपने मनोरथ का लाभ करके हृदय में प्रसन्न हुये अतः वही इनके उपासक हैं । ३२ । जो इस अत्यन्त गुप्त शिवतत्व विद्या को पढ़ता है वह सभी पापों से मुक्त होता है, और जो इसको भली भांति जानता है, इसका मनन करता है गुह कैवल्यपद का ( मोक्ष का ) अनुभव करता है । ३३ । ॥ दक्षिणामूर्त्युपनिषत् समाप्त ॥