१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
पृष्ठ 457, कुल 572 में से
संदर्भ में पढ़ेंCC0. In Public Domain. Digitization by eGangotri लांगूलोपनिषत् ] [ ४४१ अब नीचे दिये क्रम के अनुसार अङ्गन्यास करना चाहिए— (तत्तद् स्थानों को छूना चाहिए) । ॐभूः नमोः... ...अगुष्ठाभ्यां नमः हृदयाय नमः । ॐभुवः नमो... ...तर्जनीभ्यां नमः शिरसे स्वाहा । ॐस्वः नमो... ...मध्यमाभ्यां नमः शिखायै वषट् । ॐमहः... ....अनामिकाभ्यां नमः । कवचाय हुम् । ॐजनः... ...कनिष्ठिकाभ्यां नमः नेत्र त्रयाय वषट् । ॐ तपः... ...करतल पृष्ठां भ्यां नमः अस्त्राय फट् । पशुपत के द्वारा दिग्बन्धन करना चाहिये । नीचे दिये श्लोक से ध्यान करना चाहिये ( हाथ जोड़कर आंखें बन्दकर ) । वज्राङ्ग पिङ्गानेत्र... ... ...सत्वसारं प्रसन्नम् । इति मानसोपचारैः सम्पूज्य, ॐनमो भगवते दावासलका- लाग्निहनुमते (जयश्रियो जयजीविताय)धवलीकृतजगतत्रय वज्र- देह वज्रपुच्छ वज्रकाय वध्रतुण्ड वज्रमुख वज्रनख वज्रबाहो वज्ररोम वज्रनेत्र वज्रदन्त वज्रशरीर सकलात्मकाय भीमकर पिङ्गलाक्ष उग्र प्रलयकालरौद्र वीरभद्रावतार शरभसालुवभैरव- दोर्दण्ड लङ्कापुरीदाहन उदधिलङ्घन दशग्रीवकृतान्त सीता- विश्वास ईश्वरपुत्र अञ्जनागर्भसम्भूत उदयभास्करबिम्बानलग्रासक देवदानवर्षिमुनिवन्द्य पाशुपतास्त्रब्रह्मास्त्रबैलनारायणास्त्र- कालशक्तिकास्त्रदण्डकास्त्रपाशाघोरास्त्रनिवारण पाशुपतास्त्रब्रह्मा- स्त्रबैलवाखनारायणास्त्रमृड सर्वशक्तिग्रसन ममात्मरक्षाकर परविद्यानिवारण आत्मविद्यासंरक्षक अग्निदीप्त अथर्वणवेदसिद्ध- स्थिरकालाग्निनिराहारक वायुवेग मनोवेग श्रीरामतारकपरब्रह्म- विश्वरूपदर्शक लक्ष्मणप्राणप्रतिष्ठामन्दकार स्थलजलाग्निमर्मभेदिन्