भारतकोश
१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ

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४५० ] [ लांगूलोपनिषत् सर्वशत्रून् छिन्धि छिन्धि मम वैरिणः खादय खादय मम सज्जीवन- पर्वतोत्पाटन डाकिनीविध्वंसन सुग्रीवसख्यकरण निष्कलङ्क कुमारब्रह्मचारिन् दिगम्बर सर्वपाप सर्वग्रह कुमारग्रह सर्वं छेदय छेदय भेदय भेदय भिन्धि भिन्धि खादय खादय टङ्क टङ्क ताडय ताडय मारय मारय शोषय शोषय ज्वालय ज्वालय हारण हार देवदत्तं नाशय नाशय अतिशोषय अतिशोषय मम सर्वं च हनुमन् रक्ष रक्ष ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं हुं फट् घे घे स्वाहा ॥ ॐ नमो भगवते चण्डप्रतापहनुमते महावीराय सर्वदुःख- विनाशनाय ग्रहमण्डलभूतमण्डल प्रेतपिशाचमण्डलसर्वोच्चाटनाय अतिभयङ्करज्वरमाहेश्वरज्वर--विष्णुज्वर--ब्रह्मज्वर--वेताल ब्रह्म- राक्षसज्वर--पित्तज्वर-श्लेष्मसान्निपातिकज्वर--विषमज्वर--शीत- ज्वर--एकाहिकज्वर--द्वयाहिकज्वर--त्र्यं हिकज्वर--चातुर्थिकज्वर-- अर्धमासिकज्वर--मासिकज्वर--षाण्मासिकज्वर--सांवत्सरिकज्वर- अस्थ्यन्तर्गतज्वर-महापस्मार--भ्रमिकापस्मारांश्च भेदय भेदय खादय खादय ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं हुं फट् घे घे स्वाहा ॥ ॐ नमो भगवते चिन्तामणिहनुमते अङ्गशूल-अक्षिशूल- शिरश्शूल-गुल्मशूल-उदरशूल-कर्णशूल--नेत्रशूल-गुदशूल--कटिशूल जानुशूल-जघ्ड़ाशूल-हस्तशूल-पादशूल-गुल्फशूल--वातशूल-पित्त- शूल-पायुशूल--स्तनशूल-परिणामशूल-परिधामशूल--परिवाणशूल- दन्तशूल-कुक्षिशूल-सुमनश्शूल-सर्वशूलानि निर्मूलय निर्मूलय दंत्यदानवकामिनीवेताल ब्रह्मराक्षसकोलाहलनागपाशनन्तवासुकि- तक्षकार्को--टकलिङ्गपद्मककुमुदज्वल रोगपाशमहामारीन् कालपा- शविषं निर्विषं कुरु कुरु ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं हुं फट् घे घे स्वाहा ॥ ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ग्लां ग्लिं ग्लूं ॐ नमो भगवते पाताल- गहडहनुमते भैरवचनमलगजर्सिहेन्द्राक्षीपाशबन्धनान् छेदय छेदय