१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंलांगूलोपनिषत् ] [ ४५१ प्रलयमारुत कालाग्निहनुमन् श्रृंखलाबन्धं विमोक्षय विमोक्षय सर्वग्रहं छेदय छेदय मम सर्वकार्याणि साधय साधय मम प्रसादं कुरु कुरु मम प्रसन्न श्रीरामसेवकसिंह भैरवस्वरूप मां रक्ष रक्ष ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूँ ह्रां ह्रीं क्ष्मौं फ्रें श्रां श्रीं क्लां क्लीं क्रां क्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूँ ह्रैं ह्रौ ह्रः ह्रां ह्रीं हुं ख ख जय जय मारण मोहन घूर्ग घूर्ण दम दम मारय मारय वारय वारय खे खे ह्रां ह्रीं ह्रूँ हुं फट् घे घे स्वाहा ॥ ॐ नमो भगवते कालाग्निरौद्रहनुमते भ्रामय भ्रामय लव लव कुरु कुरु जय जय हस हस मादय मादय प्रज्वलय मृडय मृडय त्रासय त्रासय साहय साहय वशय वशय शामय शामय अस्त्रत्रिशूलडमरुखङ्गकालमृत्युकपालखट् वांगधर अभयशाश्वत हुँ हुँ अवतारय अवतारय हुँ हुँ अनन्तभूषण परमन्त्र-परयन्त्र शतसहस्र कोटितेज पुञ्जं भेदय भेदय अग्नि बन्धय लन्घय वायुं बन्धय वन्धय सर्वग्रह बन्धय बन्धय अनन्तापिदुष्टनागानां द्वादशकुलवृ- श्चिचकानामेकानशलूतानां विषं हन हन सर्वविषं बन्धय बन्धय बन्धय वज्रतुण्ड उटुचाटय मारणमोहनवशीकरणस्तम्भनजृम्भणाक- र्षणोच्चाटनमिलनविद्वेषणयुद्धतकंमर्माणि बन्धय बन्धय ॐ कुमा- रीपदत्रिहारबाणोग्रमूर्तये ग्रामवासिने अतिपूर्वशक्ताय सर्वायुधध- राय स्वाहा अक्षयाय घे घे घे घे ॐ लं लं लं घ्रां घ्रौं स्वाहा ॐ हलां हलीं हलूं हुँ फट् घे घे स्वाहा ॥ ॐश्रां श्रीं श्रूँ श्रैं श्रौं श्रः ॐनमो भगवते भवगते भद्रंजानिकट- रुद्रवीरहनुमते टं टं टं लं लं लं वेवदत्तदिगम्बरराष्ट्रमहाशक्त्यष्टा- ङ्गधर अष्टमहाभैरवनवब्रह्मस्वरूप दशविष्णुरूप एकदशरुद्रावतार द्वादशार्कतेजः त्रयोदशसोममुख वीरहनुमन् स्तम्भिनीमोहनीवशी- करणीतन्त्रोक्तसावयव नगरराजमुखबन्धन बलमुखमकरमुखसिंह-