१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमुखजिह्वामुखानि बन्धय बन्धय स्तम्भय स्तम्भय व्याघ्रमुखसर्व- वृश्चिकाग्निज्यालाविषं निर्गमय निर्गमय सर्वजनवैरिमुखं बन्धय बन्धय पापहर वीर हनुमन् ईश्वरावतार वायुनन्दन अञ्जनासुत बन्धय बन्धय श्रीरामचन्द्रसेवक ॐ ह्वां ह्वां ह्वां आसय सासय ह्रीं ह्लां ग्रीं क्रीं यं भें भ्रं भ्रः हट् हट् खट् खट् सर्वजन-विश्वजन- शत्रुजन-वश्यजन-सर्वजनस्य दृशं लं लां श्रीं ह्वां ह्रीं मनः स्तम्भय स्तम्भय भञ्जय भञ्जय अद्रि ह्रीं व हीं हीं मे सर्व हीं हीं सागरहीं हीं वं वं सर्वमन्त्रार्थार्थर्वणवेदसिद्धि कुरु कुरु स्वाहा। श्रीरामचन्द्र उवाच। श्रीमहादेव उवाच। श्रीवीरभद्रस्तौ उवाच। त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
इस प्रकार मानसिक पूजा करके अधोलिखित मन्त्रों का उच्चा- करना चाहिये। इनसे हवन (होम) करना है। ॐ नमो भगवते दावानल कालाग्नि हनुमते ・・・ ・・・हनुमन् रक्ष- रक्ष ॐ ह्वां ह्रीं हूं हूं फट् घे घे स्वाहा ॥१॥ ॐ नमो भगवते चण्डप्रताप हनुमते・・・ ・・・खादय खादय ॐ ह्वां ह्रीं हूं हूं फट् घे घे स्वाहा ॥२॥ ॐ नमो भगवते चिन्तामणि हनुमते・・・ ・・・निर्विषं कुरु कुरु घे घे स्वाहा ॥३॥ ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ग्लां ग्लिं ग्लूं ॐ नमो भगवते पाताल गरुड हनुमते・・・ ・・・वारय वारय ・・・ ・・・घे घे स्वाहा ॥४॥ ॐ नमो भगवते कालाग्निरुद्र हनुमते・・・ ・・・घ्रां घ्रों स्वाहा हुं फट् घे घे स्वाहा ॥५॥ ॐ श्रीं श्रीं ・・・ ॐ नमो भगवते भद्रजानिकटरुद्र-