१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ
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लांगूलोपनिषत् ] [ ४५३ वीर हनुमते... ... ...हीं हीं सागर ह्रीं ह्रीं वं वं सर्वं, मन्त्रार्थायवंच वेदसिद्धि कुरु कुरु स्वाहा ॥६॥ इस प्रकार श्री रामचन्द्र तथा शिवने वीरभद्र को तथा वीरभद्र ने उन दोनों को कहा । इस सारे विधि विधान को पूछा समझा आदि । इसे जो तीनों प्रातः मध्याह्न एवं सायं सन्ध्या के समय पढ़ता है उसको वे सभी वस्तुयें प्राप्त हो जाया करती हैं जो कि ऊपर लिखे मन्त्रों में निर्दिष्ट हैं । ॥ लांगूलोपनिषद् समाप्त ॥