१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ
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तुलस्युपनिषत् [ ५३३ हत्यायाः प्रमुच्यते । स महाभयात् प्रमुच्यते । स महादुःखात् प्रमुच्यते । देहान्ते वैकुण्ठमवाप्नोति वैकुण्ठमवाप्नोति । इत्युपनिषत् ॥ यह सब भगवान् नारायण ने ब्रह्मा को, ब्रह्मा ने नारद सन- कादियों को, सनकादि ने वेदव्यास को, वेदव्यास ने शुकदेवजी को, शुकदेव ने वामदेव को, वामदेव ने अन्य मुनियों की तथा मुनियों ने मनुष्यों को कहा। जो इसको ( तथ्य को ) जानता है वह स्त्री-हत्या से मुक्त हो जाता है। वह वीरहत्या से मुक्त हो जाता है। वह ब्रह्महत्या, महा-भय, महा-दुःख आदि से भी छूट जाता है और शरीर समाप्ति पर निश्चित वैकुण्ठ में वास प्राप्त कर लेता है। ॥ तुलस्युपनिषद् समाप्त ॥ —०—