भारतकोश
१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ

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५४२ ] [ सूर्योपनिषत् मन्त्र को नित्य प्रति जपने वाला ब्रह्मज्ञानी होता है। सूर्य की ओर मुख करके जाप करने से घोर रोग से छुटकारा मिलता है। दरिद्रता दूर होती और पाप नष्ट होते हैं। मध्याह्न काल में सूर्याभिमुख जप करने से हाल में उत्पन्न हुए पञ्च महापापों से मुक्त होता है। इस सावित्री विद्या की कहीं कुछ प्रशंसा न करे। प्रातःकाल पाठ करने वाले की भाग्यवृद्धि होती है। उसे पशु, धन आदि के साथ ही वेदार्थ ज्ञान की उपलब्धि होती है। त्रिकाल जप से सैकड़ों यज्ञों का फल मिलता है। सूर्य के हस्त नक्षत्र पर रहते हुए इसका जप करने वाला महामृत्यु से पार होता है तथा इस प्रकार जानने वाला भी महामृत्यु को लाँघ जाता है। ॥ सूर्योपनिषद् समाप्त ॥