१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१०८ उपनिषदें-हिंदी टीका सहित वेद के दुरूह रहस्यों का सरल रीति से विस्तार पूर्वक विवेचन उप- निषदों में हुआ है। प्राचीन-काल में ऋषि, मुनि मानव-जीवन की व्यक्ति- गत व सामाजिक सभी प्रकार की उलझी हुई समस्याओं को सुलझाने के लिए लाखों वर्षों से जो चिन्तन और मनन करते रहे हैं, उनका सार उप- निषदों में संचित है। आत्म-विद्या, ब्रह्मविद्या के रहस्य का उपनिषदों में विवेचन हुआ है। यह जीवन का सर्वांगपूर्ण दर्शन ही हैं। प्रमुख उपनिषदें १०८ हैं। उनमें से अब तक बहुत थोड़ी उपनिषदों का भाष्य उपलब्ध था। शेष कठिन संस्कृत में होने के कारण सर्वसाधारण के लिए दुरूह ही बनी हुई थी। प्रसन्नता की बात है कि गायत्री तपोभूमि, मथुरा के सञ्चालक वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं० श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा १०८ उपनिषदों का मूल मन्त्रों से साथ सरल व सुबोध हिन्दी भाष्य किया गया है। यह अपने ढंग का सर्व प्रथम प्रकाशन है। इसके तीन भाग हैं (१) ज्ञान खण्ड (२) ब्रह्मविद्या खण्ड (३) साधना खण्ड । ज्ञान खण्ड में विचारात्मक व आचारात्मक उपनिषदें हैं। ब्रह्मविद्या खण्ड में आध्यात्मिक रहस्यों का विवेचन है। साधना खण्ड में योग साधनों का मार्ग दर्शन है। प्रत्येक खण्ड का मूल्य ७) रु० । ३ खण्डों के सम्पूर्ण सेट का २१), रु० डाक खर्च इसके अतिरिक्त । भारत के महामान्य राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन् की सम्मति है— “यह एक महत्वपूर्ण प्रकाशन है और मुझे विश्वास है कि उसे बहुत लोग पढ़ना पसन्द करेंगे।” दैनिक हिन्दुस्तान नई दिल्ली की सम्मति—“वस्तुतः उपनिषदों ने इस संकलन में सरलता, सरसता और सुरुचिता की ज्ञान गंगा प्रवाहित की गई है। भारत के प्रसिद्ध-प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेताओं और संस्थाओं द्वारा जो प्रकाशन हमारे देखने में आए हैं, उन सबसे बढ़कर उपनिषदों का रहस्य समझने में आचार्य जी ही अधिक सफल हुए हैं।” प्रकाशक :— संस्कृति संस्थान, ख्वाजा कुतुब, बरेली (उ०प्र०)