भारतकोश
१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ

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चारों वेदों का सरल हिन्दी भाष्य ऋग्वेद—में सृष्टि रचना, प्रकृति, आत्मा और जीव का स्वरूप, धर्म- नीति, चरित्र, सदाचार, परोपकार और मनुष्य के वास्तविक कर्तव्य का सुन्दर दिग्दर्शन है। साथ ही समाज-नीति, राजनीति, अर्थनीति, अंक- गणित, रेखागणित, बीज-गणित, ज्योतिष, भूगोल, खगोल, रसायन-शास्त्र, भूगर्भ-विद्या, धातु-विज्ञान व मनोविज्ञान के मूल, सिद्धान्तों का स्पष्टी- करण किया गया है। ४ खण्डों का मूल्य २४) मात्र अथर्ववेद—में अन्न-सिद्धि, बुद्धि बढ़ाने के उपाय, वीर्य रक्षा, ब्रह्मचर्य, धन-धान्य, समय पर वृष्टि, व्यापार की वृद्धि, दीर्घ आयु और सुदृढ़ स्वास्थ्य के साधन, राज्याधिकारियों का नियन्त्रण, युद्ध में विजय, शत्रु सेना में मोह व भ्रम उत्पन्न करना आदि विषयों का विज्ञान है। २ खण्ड—मूल्य १२) मात्र यजुर्वेद—कर्मकाण्ड प्रधान वेद है। इसमें यज्ञों के विधि-विधान व विज्ञान पर प्रकाश डाला गया है। इसके साथ राजनीति, समाजनीति, अर्थनीति, शिल्प, व्यवसाय, राज्य, स्वराज्य, साम्राज्य आदि के सम्बन्ध में कल्याणकारी ज्ञान प्रदान किया गया है। मूल्य ६) मात्र सामवेद—यद्यपि चारों वेदों में आकार की दृष्टि से सबसे छोटा है, फिर भी उसकी प्रतिष्ठा सर्वाधिक है। सामवेद के मन्त्र अमूल्य रत्नों की खान हैं। इसकी भक्तिरसपूर्ण काव्य धारा में अवगाहन करने से तुरन्त ही मनुष्य का अन्तरतम निर्मल, विशुद्ध, पवित्र और रससिक्त हो जाता है। मूल्य ६) गायत्री तपोभूमि, मथुरा के संचालक वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं० श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा प्राचीन सायणभाष्य के आधार पर यह हिन्दी संस्करण सम्पादित हुआ है। इसमें मूल वेदमन्त्रों के साथ-साथ हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। प्रकाशकः संस्कृति संस्थान, ख्वाजा कुतब बरेली (उ० प्र०)