१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)
1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलपटों से उसकी गरदनें कसकर बांध देने पर और चारों ओर तोपें रखने पर गरीब नेटिवों के हजारों घर जलकर राख होने में फिर कितनी देर! इन गांवों को चारों ओर से अग लगाकर उन्हें कहीं से भी न निकलने देकर जला डालने में कितने ही अंग्रेजों को इतना आनंद आता कि उन्होंने उन दृश्यों के हास्यास्पद वर्णन लिखकर इंग्लैंड भेजे। गांव को आग इतनी जल्दी और पूरी तरह से लगाई जाती कि उसमें से बाहर निकलने का नाम भी नहीं लिया जा सकता। गरीब किसान, विद्वान, विकलांग-सारे आग की ज्वाला में जलकर राख हो जाते। गोद के दूध-पीते बच्चे के साथ उनकी माताएं जलकर राख हो जाती। बिस्तर से लगी बूढ़ी औरतें और पुरुष अपने चारों ओर धधकती आग की ज्वाला में जरा सी सरकने की शक्ति न होने से बिस्तर पर ही जलकर राख हो जाते।⁷⁵ और कोई जलकर राख नहीं हुआ? तो एक अंग्रेज अपने पत्र में लिखता है-"You will] however, be gratified to learn that 20 villages are razed to ground." (आज के हमले में हमने बीस गांव राख कर दिए हैं-यह सुनकर आपको संतोष हुए बिना नहीं रहेगा) उपर्युक्त दानवी सच्चाई, 'जनरल नील के प्रतिशोध के बारे में कुछ न लिखना ही अच्छा', ऐसी स्पष्ट प्रतिज्ञा करनेवाले अंग्रेज इतिहासकारों के उदार इतिहास में हुई चूक के कारण जो जानकारी बाहर आई है, यह उसका सारांश है। बस, इससे अधिक एक शब्द भी लिखना क्रूरता के इस नंगे चित्र को खराब करना है। इसलिए अब हताश आंखों से श्री भागीरथी और कालिंदी के प्रीति संगम की प्रेम लहरों की ओर दृष्टिपात करें। इलाहाबाद शहर बनारस से कोई सत्तर मील की दूरी पर बसा हुआ है। इस प्रयाग क्षेत्र की धार्मिक पवित्रता को वहां अकबर के शासनकाल में निर्मित विस्तीर्ण किले की अपूर्व भव्यता ने बढ़ाया है। कलकत्ता से पंजाब और दिल्ली 1857 का स्वातंत्र्य समर – 163 ⁷⁵ 1 चार्ल्स बाल कृत-'इंडियन म्युटिनी', भाग 1, पृष्ठ 242-43 । 2. वही, पृष्ठ 244 । 3. वही , पृष्ठ 242 ।