१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)
1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें1857 जैसी कितनी ही क्रूर मार-काट करे, उससे उसकी धवल नीति को तिल मात्र भी लघुता नहीं आती, उलटे कत्ल हुए अन्याय के दुष्ट अत्याचारों के घिनौनेपन में पर्वत तुल्य वृद्धि हो जाती है तथा ऐसे ही अवसरों पर मैकाले का वह प्रसिद्ध वाक्य यथार्थ हो जाता है-"The more violent the outrage, the assured we feel that a revolution was necessary". (अत्याचार जितना भयानक उतनी ही उसकी प्रतिक्रिया भी अटल) और सत्य का यह यथार्थ स्वर सुनने की क्षमता विश्व के कानों में न बचे, इसके लिए हिंदुस्थान के लोगों की क्रूरता का हल्ला-गुल्ला अगर कोई दस दिशाओं में करे तो उन अंग्रेज लोगों को ऐसा हल्ला करने का अधिकार देवदूतों ने भी स्वीकार नहीं किया, फिर मनुष्य जाति को वह कैसे मिलेगा? परंतु उस मनुष्य जाति में यदि किसी को यह अधिकार रत्ती मात्र भी न मिलना हो तो वह जाति अंग्रेज ही है। हिंदुस्थान ने सैकड़ों निरपराधियों को मार डाला, यह कौन इंग्लैंड कहेगा? नील को जन्म देनेवाला और नील की स्तुति करनेवाला इंग्लैंड ? जिस अवध ने उसे प्राणदान दिया उस अवध के गांव-के-गांव महिला-बच्चों सहित जलाकर राख करनेवाला इंग्लैंड? फांसी भी कम है, इसलिए स्वदेश के लिए लड़नेवाले पांड्य सैनिकों को वास्तव में जला देनेवाला इंग्लैंड? फांसी को या जीवित जलाने को भी जिस भय से जिन्होंने बड़े प्रेम से स्वीकार किया होता, ऐसा धर्मछल करने के लिए उन गरीब हिंदू ग्रामीणों को पकड़कर फांसी का दंड देकर उन्हें बैनेटों से छेदनेवाला और मरने के पहल उनके मुंह में गाय का रक्तरंजित मांस तलवार से ठूसनेवाला इंग्लैंड? फर्रूखाबाद के नवाब के वंशज को फांसी पर चढ़ाने के पहले-वह मुसलमान था इसलिए-उसके सारे शरीर को सूअर की चरबी लगाकर और फिर उसे सूअरे के चमड़ें में लपेटकर, भंगी से चाबुक से पिटवाकर फिर फांसी देनेवाला और यह सारा कृत्य स्वयं कमांडर-इन-चीफ सर कोलिंस की आंखों के सामने करानेवाला इंग्लैंड? हडसन को वीर कहनेवाला, आउट्रम की स्तुति करनेवाला और ये सब कृत्य विद्रोहियों का समुचित प्रतिशोध है, यह मानकर उसकी प्रशंसा करनेवाला इंग्लैंड? कानपुर की दीवारों पर वाहियात एवं नीचतापूर्ण बातें स्वयं के हाथों से लिखकर-ये मरी हुई महिलाओं की लिखी हैं, ऐसा मूलभूत छिछोरापन करनेवाला इंग्लैंड? यथार्थ प्रतिशोध˙˙! किसका? सौ वर्षों तक चक्की में पीसी गई देशमाता के लिए सतंप्त हुए पांड्य पक्ष का या उस अन्याय के कोल्हू पर निगरानी करनेवाले आंग्ल पक्ष का? किसका यथार्थ प्रतिशोध? अन्याय के ऐसे भयानक बारूदखाने के सिवाए इस शम-प्रधान हिंदुस्थान का यह भयंकर विस्फोट शांत न हुआ होता। उस अन्याय ने उनके हृदय को जलाकर रख दिया। हिंदू और मुसलमान अपनी अज्ञानजन्य शत्रुता भूलकर देशमाता के स्तन के रस से 1857 का स्वातंत्र्य समर – 230