१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)
1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहत्त्वपूर्ण कोई बात है तो वह है सब लोगों का मनःप्रवर्तन। वस्तुस्थिति के क्रांति करनी हो तो सबसे पहले मनःस्थिति पर विजय पानी चाहिए। यह मनःक्रांति की चौकियां स्थापित करनी चाहिए। यह मनःक्रांति संपादित करने के लिए मन की ओर जो भी रास्ते जाते हैं उन सारे रास्तों का क्रांति की चौकियां स्थापित करनी चाहिए। मानव मन सहज ही उत्सवप्रिय होता है, अतः सामान्य जनसमूह को वश में करने के लिए उत्सव के अतिरिक्त दूसरा राजमार्ग नहीं दिखता। इन उत्सवों को शक्कर में घोलकर सिद्धांतों की गोली दी जाए तो समाज का बालमन उसे रूचि से गटक लेता है और उससे रोग भी ठीक हो जाते हैं। ऐसे गहरे विचार से उस गुप्त संगठन के कार्य में विभिन्न चित्ताकर्षक उत्सवों से सामान्य जन को स्वतंत्रता युद्ध की शिक्षा देने की व्यवस्था की गई थी। विभिन्न प्रकार के चित्रों के खेल तैयार कर, स्वधर्म की और स्वतंत्रता की कसी अवहेलना हुई है-इसका हूबहू नाटक उन चित्रों द्वारा प्रस्तुत कराया जाता था; और उस सारे अपमान, गुलामी और परतंत्रता का प्रतिशोध किस तरह लिया जाए, इसके उद्दीपक और अनिवार्य चेतना देनेवाले चरित्र इन तारों से बंधी गुड़ियों से दरशाए जाते थे। चौपाल, पनघट, चौकी, धर्मशाला आदि बस्ती की खुली जगह में वीर रसोत्पादक गीत गाकर लोगों को चेताया जाता था। उत्तरी हिंदुस्थान का अति प्रिय गीत आल्हा, जिसे सुनने पर आठ दिन में कहीं-न-कहीं लड़ाई होनी ही चाहिए, ऐसी धारणा है, वह वीर रस से भरा गीत-गाते लोगों की बाहें फड़कने लगी। पूर्वजों के पराक्रम के स्मरण से जब उनका रक्त खौलने लगता तो तुरंत विषय घुमाकर वर्तमान दासता की पूरी बात प्रस्तुत की जाती, इस पर जो 'हर-हर महादेव' की गर्जना न करे, ऐसा कापुरुष कौन होगा? राष्ट्रकार्य के लिए केवल उस राष्ट्र के पुरुषों की अनुमति होने से ही बात पूरी नहीं होती। इसके लिए तो पुरुषों को जन्म देनेवाली कोख में भी राष्ट्र-क्षोभ के बीज अंकुरित होना आवश्यक है। भारतीय महिलाओं की शूरता कितनी सहायक होती है-यह सिखों का और राजपूतों का इतिहास अभिमानपूर्वक कहता है। भारतीय स्त्रियों की मन-सामर्थ्य संपादन हेतु इस गुप्त संगठन के कार्यक्रम में वैदू लोगों की महिलाओं को लगाया गया था।³⁵ इन वैदू महिलाओं की घरेलू दवाइयां एवं सामान्य ज्योतिष कार्य के लिए हिंदुस्थान के सामान्य वर्ग की महिलाओं में हमेशा आवाजाही होती है। अतः भारतीय स्त्रियों को ऐसी दवाई देने के लिए जिससे अपनी मातृभूमि का यह गुलामी का रोग ठीक हो और वह दवाई देने पर गुलामी का भूत मां को कब छोड़ेगा और यह भूत-बाधा उतरते ही उसे स्वतंत्रता का सुंदर बालक कब उत्पन्न होगा, यह भविष्य बताने का कार्य ये वैदू महिलाएं जितनी कुशलता से करती थीं उतना कोई धन्वंतरि भी नहीं कर सकता था। इन वैदू महिलाओं ने महिलाओं में और मौलवी तथा पंडितों ने पुरुष समाज 1857 का स्वातंत्र्य समर - 85 ³⁵ ट्रेवेलियन।