भारतकोश
अभिज्ञानशाकुन्तलम् (विमला-चन्द्रकला संस्कृत-हिन्दी व्याख्या सहित)

अभिज्ञानशाकुन्तलम् (विमला-चन्द्रकला संस्कृत-हिन्दी व्याख्या सहित)

Abhijnanashakuntalam with Sanskrit-Hindi Commentary

महाकवि कालिदास / डॉ. श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी द्वारा

DevanagariSanskritpublished540 पृष्ठ

पृष्ठ 82, कुल 540 में से

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स्त्री-पात्र

नटी — सूत्रधार की पत्नी। शकुन्तला — नाटक की नायिका, महर्षि कण्व की पोष्यपुत्री, मेनका से विश्वामित्र द्वारा उत्पन्न कन्या। अनसूया, प्रियंवदा — शकुन्तला की प्रिय सखियाँ। गौतमी — कुलपति कण्व की धर्मभगिनी। प्रतिहारी — राजा दुष्यन्त की परिचायिका। सानुमती या मिश्रकेशी } मेनका की प्रिय सखी, एक अप्सरा। परभृतिका, मधुकरिका } राजा दुष्यन्त के प्रमदवन की परिपालिका दासियाँ। चतुरिका — चेटी, राजा दुष्यन्त की दासी। प्रथमा तापसी — महर्षि कश्यप के आश्रम में रहनेवाली सर्वदमन की रक्षिका दासी। द्वितीया तापसी — महर्षि कश्यप के आश्रम में रहनेवाली सर्वदमन की रक्षिका दासी। अदिति — महर्षि कश्यप की धर्मपत्नी, देवताओं की माता, दक्ष की कन्या।

प्रसङ्गवश वर्णित अन्य पात्र

मघवा — देवताओं के राजा इन्द्र, हरि, आखण्डल, शतक्रतु, सहस्राक्ष आदि। दुर्वासा — एक ऋषि, महर्षि अत्रि तथा अनसूया जी के पुत्र। कौशिक — कुशिक के पुत्र तथा शकुन्तला के जन्मदाता पिता राजर्षि विश्वामित्र। मेनका — इन्द्रपुरी की एक अप्सरा, शकुन्तला की माँ। जयन्त — जयन्ती = शची, इन्द्राणी से उत्पन्न इन्द्र का पुत्र। नारद — देवर्षिनारद, ब्रह्माजी के अङ्गज पुत्र (उत्सङ्गान्नारदो यशे)। हंसपदिका — राजादुष्यन्त की अन्यतमा भार्या। सुमती — दुष्यन्त की अवसरज्ञा धर्मपत्नी।


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