अभिज्ञानशाकुन्तलम् (विमला-चन्द्रकला संस्कृत-हिन्दी व्याख्या सहित)

अभिज्ञानशाकुन्तलम् (विमला-चन्द्रकला संस्कृत-हिन्दी व्याख्या सहित)
Abhijnanashakuntalam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाकवि कालिदास / डॉ. श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी द्वारा
DevanagariSanskritpublished540 पृष्ठ
पृष्ठ 81, कुल 540 में से
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कण्व, दुर्वासा, मारीच, सर्वदमन
पात्र-परिचय
पुरुष-पात्र
| सूत्रधार | नाटका प्रधान पात्र तथा रंगमंच का अध्यक्ष। |
| दुष्यन्त | नाटक का नायक, हस्तिनापुर का राजा। |
| सूत | राजा दुष्यन्त का सारथि। |
| वैखानस | कण्व के आश्रम का ब्रह्मचारी। |
| विदूषक (माधव्य) | वेश-भूषा, आकार एवं वाणी द्वारा दुष्यन्त का हास्यकार मित्र एवं नर्म सचिव। |
| भद्रसेन | राजा दुष्यन्त का सेनापति। |
| रैवतक | दौवारिक, द्वारपाल, राजा का द्वाररक्षक। |
| ऋषिकुमार | महर्षि कण्व के आश्रम में रहने वाले दो मुनि बालक। |
| वैतालिक | राजा दुष्यन्त के दरबार के स्तुतिपाठक, दो भाट। |
| कण्व | आश्रम के कुलपति, शकुन्तला के पालक पिता। |
| हारित | कुलपति कण्व का एक शिष्य। |
| शिष्य | ,, |
| शाङ्ग्ररव | कुलपति का व्यावहारिक शिष्य। |
| शारद्वत | कुलपति का गम्भीर शिष्य। |
| कञ्चुकी | राजा दुष्यन्त का नौकर, रनिवास की देख-भाल करने वाला। |
| करभक | हस्तिनापुर निवासी माताओं का सन्देशवाहक दूत, वातायन। |
| पुरुष (धीवर) | एक मछुवा। |
| श्याल | राजा का शाला, नगररक्षक, नगर का कोतवाल। |
| सूचक, जानुक | नगर के सिपाही। |
| सोमरात | राजा का पुरोहित। |
| मातलि | इन्द्र का सारथि। |
| मारीच | ब्रह्माजी के पौत्र, मरीचि के पुत्र, प्रजापति कश्यप। |
| सर्वदमन (भरत) | शकुन्तला से उत्पन्न राजा दुष्यन्त का औरस पुत्र। |
| गालव | महर्षि कश्यप का शिष्य। |