अभिज्ञानशाकुन्तलम् (विमला-चन्द्रकला संस्कृत-हिन्दी व्याख्या सहित)
Abhijnanashakuntalam with Sanskrit-Hindi Commentary
महाकवि कालिदास / डॉ. श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी द्वारा
४५४ | अभिज्ञानशाकुन्तलम्
(७१) प्रश्नः—अभिज्ञानशाकुन्तलस्य भरतवाक्यं लिखत ?
उत्तरम्—
प्रवर्ततां प्रकृतिहिताय पार्थिवः
सरस्वती श्रुतिमहतां महीयताम्।
ममापि च क्षयमतु नीललोहितः
पुनर्भवं परिगतशक्तिरात्मभूः॥
(७२) प्रश्नः—भरतवाक्येन किं वाञ्छति कविः ?
**उत्तरम्—**समस्ताः पृथ्वीपतयः स्वसुखनिरपेक्षाः सन्तः प्रजानामेव श्रेयसे सर्वदा प्रवर्तन्ताम्, महाकवीनां सरसाः कविताश्च सहृदयानां हृदयेषु चमत्कारं जनयित्वा विशिष्टसम्मानं लभन्ताम्, सर्वशक्तिशाली पार्वतीपतिः परमेश्वरश्च जन्मान्तरं निरस्य शाश्वतं पदं दिशत्विति शम्।
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