अभिज्ञानशाकुन्तलम् (सन्दर्भदीपिका टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

अभिज्ञानशाकुन्तलम् (सन्दर्भदीपिका टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Abhijnanashakuntalam of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Abhijnanashakuntalam with Sandarbhadipika Tika & Hindi Translation (उद्गम)
DevanagariHindipublished262 पृष्ठ
पृष्ठ 251, कुल 262 में से
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परिशिष्ट-1
| सं० | चन्द्रशेखरेण निर्दिष्टाः श्लोकाः।। | अङ्कः | क्रमः | पृष्ठांकः |
|---|---|---|---|---|
| 1 | अक्लिष्टबालतरुपल्लव० | 6 | 23 | 210 |
| 2 | अतः समीक्ष्य कर्तव्यं विशेषात्० | 5 | 27 | 188 |
| 3 | अद्यापि नूनं हरकोपवह्नि० | 3 | 3 | 135 |
| 4 | अधरः किसलयरागः कोमल० | 1 | 21 | 108 |
| 5 | अध्याक्रान्ता वसतिरमुना० | 2 | 15 | 130 |
| 6 | अनवरतधनुर्ज्यास्फालन० | 2 | 4 | 124 |
| 7 | अनाघ्रातं पुष्पं किसलयमलूनं० | 2 | 11 | 128 |
| 8 | अनिर्द्योपभोग्यस्य रूपस्य० | 3 | 30 | 148 |
| 9 | अनिशमपि मकरकेतुर्मनसो० | 3 | 5 | 135 |
| 10 | अनुकारिणि पूर्वेषां युक्ति० | 2 | 17 | 131 |
| 11 | अनुमतगमना शकुन्तला सा तरुभि० | 4 | 12 | 167 |
| 12 | अनुयास्यन् मुनितनयां सहसा० | 1 | 29 | 116 |
| 13 | अनेन कस्यापि कुलांकुरेण० | 7 | 19 | 226 |
| 14 | अनेन लीलाभरणेन ते प्रिये० | 3 | 32 | 149 |
| 15 | अन्तर्गतप्रार्थनमन्तिकस्थं० | 7 | 2 | 220 |
| 16 | अन्तर्हिते शशिनि सैव कुमुद्वती० | 4 | 3 | 159 |
| 17 | अपयास्यति मे शोकः कथं० | 4 | 23 | 173 |
| 18 | अपराधमिमं ततः सहिष्ये यदि० | 3 | 24 | 145 |
| 19 | अप्यौत्सुक्ये महति दयित० | 3 | 27 | 147 |
| 20 | अभिजनवतो भर्तुः श्लाघ्ये० | 4 | 21 | 172 |
| 21 | अभिमुखे मयि संवृतमीक्षितं० | 2 | 12 | 128 |
| 22 | अभ्यक्तमिव स्नातः शुचिर० | 5 | 12 | 180 |
| 23 | अभ्युन्नता पुरस्तादवगाढा० | 3 | 9 | 136 |