अभिज्ञानशाकुन्तलम् (सन्दर्भदीपिका टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

अभिज्ञानशाकुन्तलम् (सन्दर्भदीपिका टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Abhijnanashakuntalam of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Abhijnanashakuntalam with Sandarbhadipika Tika & Hindi Translation (उद्गम)
DevanagariHindipublished262 पृष्ठ
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238 \hfill चन्द्रशेखरचक्रवर्तिकृतसन्दर्भदीपिकया समलङ्कृतम्
| सं० | चन्द्रशेखरेण निर्दिष्टाः श्लोकाः।। | अङ्कः | क्रमः | पृष्ठांकः |
|---|---|---|---|---|
| 24 | अमी वेदीं परितः क्लृप्तधिष्ण्याः० | 4 | 10 | 166 |
| 25 | अयं स ते तिष्ठति संगमोत्सुको० | 3 | 16 | 141 |
| 26 | अयं स ते श्यामलतामनोहरं० | 3 | 35 | 150 |
| 27 | अयं स यस्मात् प्रणयावधीरणा० | 3 | 17 | 141 |
| 28 | अयमगविवरेभ्यश्चातकैर्नि० | 7 | 7 | 221 |
| 29 | अरिहसि मे चुअङ्कुर दिण्णो० | 6 | 3 | 198 |
| 30 | अर्थो हि कन्या परकीय एव० | 4 | 24 | 174 |
| 31 | अर्धपीतस्तनं मातुरमर्दमक्लिष्ट० | 7 | 14 | 224 |
| 32 | अशिशिरतरैरन्तस्तापैर्विवर्ण० | 3 | 15 | 140 |
| 33 | असंशयं क्षत्रपरिग्रहक्षमा० | 1 | 22 | 110 |
| 34 | अस्मात् परं बत यथास्मृति० | 6 | 28 | 214 |
| 35 | अस्मान् साधु विचिन्त्य संयमध० | 4 | 19 | 170 |
| 36 | अस्यास्तुंगमिव स्तनद्वयमिदं० | 6 | 16 | 207 |
| 37 | अहन्यहन्यात्मन एव ताव० | 6 | 32 | 217 |
| 38 | अहिणवमहुलोहभाविओ० | 5 | 8 | 177 |
| 39 | आ जन्मनः शाठ्यमशिक्षितो० | 5 | 28 | 188 |
| 40 | आ परितोषाद् विदुषां न साधु० | 1 | 2 | 97 |
| 41 | आअम्बहरिअवेण्टं ऊससिअं विअ० | 6 | 2 | 197 |
| 42 | आखण्डलसमो भर्ता जयन्त० | 7 | 28 | 233 |
| 43 | आचार इत्यधिकृतेन मया० | 5 | 1 | 175 |
| 44 | आमूलशुद्धसंततिकुलमेतत्० | 6 | 29 | 215 |
| 45 | आलक्ष्यदन्तमुकुलान० | 7 | 17 | 226 |
| 46 | इतः प्रत्यादिष्टा स्वजनमनुगन्तुं० | 6 | 10 | 203 |
| 47 | इदं किलाव्याजमनोहरं वपु० | 1 | 17 | 106 |
| 48 | इदमनन्यपरायणमन्यथा० | 3 | 22 | 144 |
| 49 | इदमप्युपकृतिपक्षे सुरभि मुखं० | 3 | 37 | 152 |
| 50 | इदमुपनतमेवं रूपमक्लिष्ट० | 5 | 20 | 184 |
| 51 | इदमुपहितसूक्ष्मग्रन्थिना० | 1 | 18 | 106 |
| 52 | उत्पक्ष्मणोर्नयनयोरुपरुद्धवृत्तिं० | 4 | 17 | 170 |
| 53 | उत्सृज्य कुसुमशयनं नलिनी० | 3 | 26 | 147 |