अभिज्ञानशाकुन्तलम् (सन्दर्भदीपिका टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

अभिज्ञानशाकुन्तलम् (सन्दर्भदीपिका टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Abhijnanashakuntalam of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Abhijnanashakuntalam with Sandarbhadipika Tika & Hindi Translation (उद्गम)
DevanagariHindipublished262 पृष्ठ
पृष्ठ 253, कुल 262 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 253
अभिज्ञानशकुन्तलम् परिशिष्ट-१ 239
| सं० | चन्द्रशेखरेण निर्दिष्टाः श्लोकाः।। | अङ्कः | क्रमः | पृष्ठांकः |
|---|---|---|---|---|
| 54 | उदेति पूर्वं कुसुमं ततः फलं० | 7 | 30 | 233 |
| 55 | उन्नमितैकभ्रूलतमाननमस्याः० | 3 | 18 | 142 |
| 56 | उपकृत्य हरेस्तस्या भवाल्लंघु० | 7 | 1 | 220 |
| 57 | उपहितस्मृतिरङ्गुलिमुद्रया० | 6 | 9 | 201 |
| 58 | उपोढशब्दा न रथाङ्गनेमयः० | 7 | 10 | 222 |
| 59 | उल्ललइ दब्भकवलं मई० | 4 | 14 | 168 |
| 60 | एकैकमत्र दिवसे दिवसे मदीयं० | 6 | 13 | 205 |
| 61 | एवमाश्रमविरुद्धवृत्तिना० | 7 | 18 | 226 |
| 62 | एष त्वामभिनवकण्ठशोणितार्थी० | 6 | 33 | 217 |
| 63 | एषा कुसुमनिषण्णा तृषिता० | 6 | 22 | 210 |
| 64 | औत्सुक्यमात्रमवसादयति० | 5 | 5 | 176 |
| 65 | कः पौरवे वसुमतीं शासति० | 1 | 25 | 111 |
| 66 | कठिनमपि मृगाक्ष्या वल्कलं० | 1 | 20 | 107 |
| 67 | कथं नु तं कोमलबन्धुरा० | 6 | 14 | 206 |
| 68 | कर्कन्धूनामुपरि तुहिनं रञ्जय० | 4 | 4 | 159 |
| 69 | का कथा बाणसंधाने ज्या० | 3 | 1 | 134 |
| 70 | कामं प्रत्यादिष्टां स्मरामि न० | 5 | 34 | 191 |
| 71 | कामं प्रिया न सुलभा मनस्तु० | 2 | 1 | 121 |
| 72 | कार्या सैकतलीनहंसमिथुना० | 6 | 20 | 209 |
| 73 | किं कृतकार्यद्वेषाद् धर्मं प्रति० | 5 | 19 | 183 |
| 74 | किं तावद् व्रतिनामुपोढतपसां० | 5 | 10 | 179 |
| 75 | किं शीकरैः क्लमविमर्दिभि० | 3 | 25 | 146 |
| 76 | कुतो धर्मक्रियाविघ्नः सतां० | 5 | 15 | 181 |
| 77 | कुमुदान्येव शशाङ्कः सविता० | 5 | 31 | 189 |
| 78 | कुल्याम्भोभिः पवनचपलैः० | 1 | 14 | 103 |
| 79 | कृतं न कर्णार्पितबन्धनं० | 6 | 21 | 209 |
| 80 | कृतः शरव्यं हरिणा तवासुरा० | 6 | 35 | 218 |
| 81 | कृतावमर्गामनुमन्यमानः० | 5 | 21 | 184 |
| 82 | कृत्ययोर्भिन्नदेशत्वाद्० | 2 | 18 | 132 |
| 83 | कृष्णसारे ददच्चक्षुस्त्वयि० | 1 | 6 | 100 |