अभिज्ञानशाकुन्तलम् (सन्दर्भदीपिका टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

अभिज्ञानशाकुन्तलम् (सन्दर्भदीपिका टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Abhijnanashakuntalam of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Abhijnanashakuntalam with Sandarbhadipika Tika & Hindi Translation (उद्गम)
DevanagariHindipublished262 पृष्ठ
पृष्ठ 254, कुल 262 में से
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240 चन्द्रशेखरचक्रवर्तिकृतसन्दर्भदीपिकया समलङ्कृतम्
| सं० | चन्द्रशेखरेण निर्दिष्टाः श्लोकाः ।। | अङ्कः | क्रमः | पृष्ठांकः |
|---|---|---|---|---|
| 84 | केयमवगुण्ठनवती नातिपरि० | 5 | 14 | 181 |
| 85 | क्व वयं क्व परोक्षमन्मथो मृग० | 2 | 19 | 133 |
| 86 | क्षणात्प्रबोधमायाति लंघ्यते० | 5 | 2 | 175 |
| 87 | क्षामक्षामकपोलमानन० | 3 | 12 | 138 |
| 88 | क्षौमं केनचिदिन्दुपाण्डु तरुणा० | 4 | 7 | 164 |
| 89 | खणचुम्बिआइँ भमरेहिँ उअह० | 1 | 4 | 98 |
| 90 | गच्छति पुरः शरीरं धावति० | 1 | 34 | 119 |
| 91 | गान्धर्वेण विवाहेन बह्व्यो थ० | 3 | 28 | 148 |
| 92 | गाहन्तां महिषा निपानसलिलं० | 2 | 6 | 125 |
| 93 | ग्रीवाभङ्गाभिरामं मुहु० | 1 | 7 | 100 |
| 94 | चलापाङ्गां दृष्टिं स्पृशसि० | 1 | 24 | 110 |
| 95 | चारुणा स्फुरितेनायमपरिक्षत० | 3 | 36 | 151 |
| 96 | चित्ते निवेश्य परिकल्पित० | 2 | 10 | 127 |
| 97 | चूतानां चिरनिर्गतापि कलिका० | 6 | 4 | 198 |
| 98 | जाने तपसो वीर्यं सा बाला० | 3 | 2 | 134 |
| 99 | ज्वलति चलितेन्धनो ग्निर्विप्रकृत० | 6 | 37 | 219 |
| 100 | णावेक्खिओ गुरुअणो इमीअ० | 5 | 17 | 182 |
| 101 | तदाशु कृतसंधानं प्रतिसंहर० | 1 | 11 | 102 |
| 102 | तदेषा भवतः पत्नी त्यज वैनं० | 5 | 29 | 188 |
| 103 | तपति तनुगात्रि मदनस्त्वाम्० | 3 | 20 | 143 |
| 104 | तव कुसुमशरत्वं शीतरश्मि० | 3 | 4 | 135 |
| 105 | तव भवतु बिडौजाः प्राज्यवृष्टि० | 7 | 34 | 235 |
| 106 | तव सुचरितमङ्गुरीय नूनं० | 6 | 12 | 204 |
| 107 | तवास्मि गीतरागेण हारिणा० | 1 | 5 | 99 |
| 108 | तस्याः पुष्पमयी शरीरलुलिता० | 3 | 39 | 154 |
| 109 | तस्याग्रभागाद् गृहनीलकण्ठै० | 6 | 31 | 216 |
| 110 | तीव्राघातादभिमुखतरुस्कन्ध० | 1 | 33 | 118 |
| 111 | तुज्झ ण आणे हिअअं मम० | 3 | 19 | 142 |
| 112 | तुज्झे ज्जेव प्रमाणं जाणध० | 5 | 26 | 187 |
| 113 | तुरगखुरहतस्तथा हि रेणुर्विटप० | 1 | 32 | 118 |