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अभिज्ञानशाकुन्तलम् (सन्दर्भदीपिका टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Abhijnanashakuntalam of Kalidasa Hindi

महाकवि कालिदास द्वारा

स्रोत: Abhijnanashakuntalam with Sandarbhadipika Tika & Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished262 पृष्ठ

अभिज्ञानशकुन्तलम् परिशिष्ट-1 243

सं०चन्द्रशेखरेण निर्दिष्टाः श्लोकाः।।अङ्कःक्रमःपृष्ठांकः
174यात्येकतो स्ताशिखरं पतिरोषधी०42159
175यास्यत्यद्य शकुन्तलेति हृदयं०48165
176येन येन वियुज्यन्ते प्रजाः०626213
177यो हनिष्यति वध्यं त्वां रक्ष्यं०634218
178रथेनानुद्धातस्तिमितगतिना०733234
179रम्यं द्वेष्टि यथा पुरा प्रकृतिभिः०65199
180रम्याणि वीक्ष्य मधुरांश्च०59178
181रम्यान्तरः कमलिनीहरितैः सरोभि०413167
182रहः प्रत्यासत्तिं यदि सुवदना०340154
183ललितोप्सरोभवं किल मुनेरपत्यं०29127
184वल्मीकार्धनिमग्नमूर्तिरुरग्०711223
185वसने परिधूसरे वसाना नियमक्षाम०721229
186वाचं न मिश्रयति यद्यपि०131118
187विचिन्तयन्ती यम् अनन्यमानसा०41156
188विच्छित्तिशेषैः सुरसुन्दरीणां75221
189वृथैव संकल्पशतैरजस्रमनङ्ग०36135
190वैखानसं किमनया व्रतमाप्र०127115
191व्यपदेशमाविलयितुं समीहसे०522185
192शक्योरविन्दसुरभिः कणवाही०38136
193शमप्रधानेषु तपोवनेषु गूढं०27125
194शशिकरविशदान्यास्तथा०311137
195शहये किल ये वि णिन्दिदे०61193
196शान्तमिदमाश्रमपदं स्फुरति०115104
197शापादसि प्रतिहता स्मृतिलोप०732234
198शुद्धान्तदुर्लभमिदं वपुराश्रम०116105
199शुश्रूषस्व गुरून् कुरु प्रियसखी०420171
200शैलानामवरोहतीव शिखराद्०78222
201संकल्पितं प्रथममेव मया०415168
202संदष्टकुसुमशयनान्याशु०321143
203संमीलन्ति न तावद् बन्धनकोशा०37136

244 चन्द्रशेखरचक्रवर्तिकृतसन्दर्भदीपिकया समलङ्कृतम्

सं०चन्द्रशेखरेण निर्दिष्टाः श्लोकाः।।अङ्कःक्रमःपृष्ठांकः
204संरोपिते प्यात्मनि धर्मपत्नी०627214
205सख्यस्ते स किल शतक्रतोरवध्य०636218
206सतीमपि ज्ञातिकुलैकसंश्रयां०518183
207सरसिजमनुविद्धं शैवलेनापि०119107
208सा निन्दन्ती स्वानि भाग्यानि०533190
209साक्षात् प्रियामुपगतामपहाय०618207
210सायंतने सवनकर्मणि संप्रवृत्ते०341154
211सिध्यन्ति कर्मसु महत्स्वपि०74220
212सुखपरस्य हरेरुभयैः कृतं०73220
213सुतनु हृदयात् प्रत्यादेशव्यलीक०724230
214सुभगसलिलावगाहाः पाटलिंसंसर्ग०1397
215स्तनन्यस्तोशीरं प्रशिथिल०310137
216स्त्रीणामशिक्षितपटुत्वम्०523187
217स्निग्धं वीक्षितमन्यतो पि नयने०22121
218स्मर एव तापहेतुर्निवापयिता०314139
219स्मृतिभिन्नमोहतमसो दिष्ट्या०722230
220स्रस्तांसावतिमात्रलोहिततलौ०130117
221स्वप्नो नु माया नु मतिभ्रमो०611204
222स्वसुखनिरभिलाषः खिद्यसे०56176
223स्वायंभुवान्मरीचेर्यः प्रबभूव०79222
224स्विन्नांगुलिनिवेशाद् रेखा०619208
225हरकोपाग्निदग्धस्य दैवेनामृत०334150

परिशिष्ट-2

( सन्दर्भदीपिका में निर्दिष्ट ग्रन्थ एवं ग्रन्थकारों की अ-कारादि क्रम से नामावली )

  1. अद्भुतसागरः-(1)-15
  2. अनन्तार्णवः-(2)-3
  3. अमरः-(1)-4, 7, 8, 12, (2)-2, 8, 12, (3)-6, 15, 25, (4)-9, (5)-9, 14, 19, 28, (7)-11,
  4. अमरटीका-(6)-30,
  5. आगमः-(7)-35,
  6. कविकण्ठहारः-(1)-25,
  7. कविकल्पलतिका-(3)-5,
  8. कालिदासः-(1)-1,
  9. काव्यमीमांसकः-(1)-6,
  10. कोषः-(1)-16, 20, (2)-10, (3)-24, (5)-21,
  11. गुरवः-(1)-10,
  12. चतुर्भुजमिश्रः-(1)-1,
  13. तीरभुक्तीयग्रन्थः-(1)-20,
  14. त्रिकाण्डशेषः-(4)-6,
  15. त्रिलोचनमिश्रः-(1)-1, 23, 24, (3)-5, (6)-33,
  16. दर्पणकारः (विश्वनाथः)-(3)-38, (5)-4,
  17. दाक्षिणात्यग्रन्थः-(1)-20, (6)-16,
  18. दुर्गटीका-(2)-15,
  19. देशी-(4)-18, (5)-19,
  20. नव्याः-(1)-1, 14,
  21. नाट्यलोचनः-(1)-23, 24, (3)-5, (6)-33,
  22. पाणिनिसूत्रम्-(1)-15, (2)-1 से पूर्व,
  23. पुराणपुस्तकम्-(5)-24,

246 चन्द्रशेखरचक्रवर्तिकृतसन्दर्भदीपिकया समलङ्कृतम्

  1. प्राकृतसूत्रम्-(1)-2, 15, 20, (3)-19, 37, (4)-13, (6)-2, 32, (7)-20,
  2. प्राचीनपुस्तकम्-(5)-20,
  3. प्राज्ञः (महिमभट्टः)-(2)-6,
  4. भरतः-(1)-1, 4, 5, 16, 21, 23, 24, (2)-1, 3, 13, (3)-1, 2, 10, 11, 14, 19, 20, 35, (4)-5, (5)-1, (6)-2,
  5. भर्तृहरिमिश्रः-(1)-1,
  6. मनुः-(1)-14, (3)-28, (5)-14,
  7. मेदिनी-(1)-10, 12, 16, (2)-11, (3)-25, 30, (6)-29,
  8. वामदेवमिश्रः-(1)-1,
  9. विदेशीयपुस्तकम्-(1)-14, 17, (4)-20, (6)-14, 20, (7)-5,
  10. व्याकरणम्-(5)-14, 30,
  11. व्याडिः-(1)-1,
  12. शङ्करः-(1)-1, 3, 4, 5, 9, 9, 10, 14, 15, 15, 16,17, 17, 20, 21, 21, 23, 24, 24, 24, 25, 25, 27, (2)-1, 3, 4, 4, 4, 5, 6, 7, 7, 7, 10, 11, 14, 17,17, (3)-5, 8, 20, 23, 28, 33, 36,37,37,37, 40, (4) 1, 1, 2, 3, 5, 5, 6, 6, 7,14,18,19, (5)-5,5,9,10, 11, 17,18, 20, 23, (6)-1, 2, 2, 6, 11, 15, 27, 34, (7)-6, 8, 11, 13, 14, 15, 20, 20,
  13. शाश्वतः-(1)-12, 12, 14, 26, (3)-9, 23, (4)-15, 20,
  14. सामुद्रिकः-(7) -15,
  15. साहसांकः-(1)-1,
  16. साहित्यदर्पणः-(2)-4,
  17. साहित्यरत्नाकरः-(1)-20, 23, (यज्ञनारायण दीक्षितः)
  18. हारावली-(4)-18, (6) 1.

सन्दर्भ ग्रन्थ-सूचि:

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Abhijnanaśakuntala, (The purer Devanagari Text), Ed. Prof. P.N. Patankar, Pub. Shiralkar&Co., Poona, 1902

Abhijnana Śakuntalam, Ed. Sharad Ranjan Rai, Calcutta, 1908

Abhijnana Śakuntalam, Ed. S.K. Belvalkar, Pub. Sahity Akademi, New Delhi, 1965

Die Kac'mirer Śakuntala–Handschrift, Ed. Karl Burkhard, Published in SITZUNGSBERICHTE Der Philosophisch & Historiischen Classe, Wein, Germany, 1884

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Patankar, P.N. (1902), TheAbhijnanaśakuntala, Poona: Shiralkar & Co, Boodhwar Peith, Poona.

Pischel, R. (1876] (Seond edition & 1922), Kalidāsa's Śakuntala, an Ancient Hindu Drama, Cambridge: Harvard University Press.

Sacuntala Annulo Recognita, (Textum Recensionis Devanagaricae Recognovit)] Ed. Carolus Burkhard, Vratislaviae, Impensis J.U. Kerni, Bonnensis, 1872

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248 चन्द्रशेखरचक्रवर्तिकृतसन्दर्भदीपिकया समलङ्कृतम्

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