अभिज्ञानशाकुन्तलम् (सन्दर्भदीपिका टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Abhijnanashakuntalam of Kalidasa Hindi
महाकवि कालिदास द्वारा
स्रोत: Abhijnanashakuntalam with Sandarbhadipika Tika & Hindi Translation (उद्गम)
244 चन्द्रशेखरचक्रवर्तिकृतसन्दर्भदीपिकया समलङ्कृतम्
| सं० | चन्द्रशेखरेण निर्दिष्टाः श्लोकाः।। | अङ्कः | क्रमः | पृष्ठांकः |
|---|---|---|---|---|
| 204 | संरोपिते प्यात्मनि धर्मपत्नी० | 6 | 27 | 214 |
| 205 | सख्यस्ते स किल शतक्रतोरवध्य० | 6 | 36 | 218 |
| 206 | सतीमपि ज्ञातिकुलैकसंश्रयां० | 5 | 18 | 183 |
| 207 | सरसिजमनुविद्धं शैवलेनापि० | 1 | 19 | 107 |
| 208 | सा निन्दन्ती स्वानि भाग्यानि० | 5 | 33 | 190 |
| 209 | साक्षात् प्रियामुपगतामपहाय० | 6 | 18 | 207 |
| 210 | सायंतने सवनकर्मणि संप्रवृत्ते० | 3 | 41 | 154 |
| 211 | सिध्यन्ति कर्मसु महत्स्वपि० | 7 | 4 | 220 |
| 212 | सुखपरस्य हरेरुभयैः कृतं० | 7 | 3 | 220 |
| 213 | सुतनु हृदयात् प्रत्यादेशव्यलीक० | 7 | 24 | 230 |
| 214 | सुभगसलिलावगाहाः पाटलिंसंसर्ग० | 1 | 3 | 97 |
| 215 | स्तनन्यस्तोशीरं प्रशिथिल० | 3 | 10 | 137 |
| 216 | स्त्रीणामशिक्षितपटुत्वम्० | 5 | 23 | 187 |
| 217 | स्निग्धं वीक्षितमन्यतो पि नयने० | 2 | 2 | 121 |
| 218 | स्मर एव तापहेतुर्निवापयिता० | 3 | 14 | 139 |
| 219 | स्मृतिभिन्नमोहतमसो दिष्ट्या० | 7 | 22 | 230 |
| 220 | स्रस्तांसावतिमात्रलोहिततलौ० | 1 | 30 | 117 |
| 221 | स्वप्नो नु माया नु मतिभ्रमो० | 6 | 11 | 204 |
| 222 | स्वसुखनिरभिलाषः खिद्यसे० | 5 | 6 | 176 |
| 223 | स्वायंभुवान्मरीचेर्यः प्रबभूव० | 7 | 9 | 222 |
| 224 | स्विन्नांगुलिनिवेशाद् रेखा० | 6 | 19 | 208 |
| 225 | हरकोपाग्निदग्धस्य दैवेनामृत० | 3 | 34 | 150 |
परिशिष्ट-2
( सन्दर्भदीपिका में निर्दिष्ट ग्रन्थ एवं ग्रन्थकारों की अ-कारादि क्रम से नामावली )
- अद्भुतसागरः-(1)-15
- अनन्तार्णवः-(2)-3
- अमरः-(1)-4, 7, 8, 12, (2)-2, 8, 12, (3)-6, 15, 25, (4)-9, (5)-9, 14, 19, 28, (7)-11,
- अमरटीका-(6)-30,
- आगमः-(7)-35,
- कविकण्ठहारः-(1)-25,
- कविकल्पलतिका-(3)-5,
- कालिदासः-(1)-1,
- काव्यमीमांसकः-(1)-6,
- कोषः-(1)-16, 20, (2)-10, (3)-24, (5)-21,
- गुरवः-(1)-10,
- चतुर्भुजमिश्रः-(1)-1,
- तीरभुक्तीयग्रन्थः-(1)-20,
- त्रिकाण्डशेषः-(4)-6,
- त्रिलोचनमिश्रः-(1)-1, 23, 24, (3)-5, (6)-33,
- दर्पणकारः (विश्वनाथः)-(3)-38, (5)-4,
- दाक्षिणात्यग्रन्थः-(1)-20, (6)-16,
- दुर्गटीका-(2)-15,
- देशी-(4)-18, (5)-19,
- नव्याः-(1)-1, 14,
- नाट्यलोचनः-(1)-23, 24, (3)-5, (6)-33,
- पाणिनिसूत्रम्-(1)-15, (2)-1 से पूर्व,
- पुराणपुस्तकम्-(5)-24,
246 चन्द्रशेखरचक्रवर्तिकृतसन्दर्भदीपिकया समलङ्कृतम्
- प्राकृतसूत्रम्-(1)-2, 15, 20, (3)-19, 37, (4)-13, (6)-2, 32, (7)-20,
- प्राचीनपुस्तकम्-(5)-20,
- प्राज्ञः (महिमभट्टः)-(2)-6,
- भरतः-(1)-1, 4, 5, 16, 21, 23, 24, (2)-1, 3, 13, (3)-1, 2, 10, 11, 14, 19, 20, 35, (4)-5, (5)-1, (6)-2,
- भर्तृहरिमिश्रः-(1)-1,
- मनुः-(1)-14, (3)-28, (5)-14,
- मेदिनी-(1)-10, 12, 16, (2)-11, (3)-25, 30, (6)-29,
- वामदेवमिश्रः-(1)-1,
- विदेशीयपुस्तकम्-(1)-14, 17, (4)-20, (6)-14, 20, (7)-5,
- व्याकरणम्-(5)-14, 30,
- व्याडिः-(1)-1,
- शङ्करः-(1)-1, 3, 4, 5, 9, 9, 10, 14, 15, 15, 16,17, 17, 20, 21, 21, 23, 24, 24, 24, 25, 25, 27, (2)-1, 3, 4, 4, 4, 5, 6, 7, 7, 7, 10, 11, 14, 17,17, (3)-5, 8, 20, 23, 28, 33, 36,37,37,37, 40, (4) 1, 1, 2, 3, 5, 5, 6, 6, 7,14,18,19, (5)-5,5,9,10, 11, 17,18, 20, 23, (6)-1, 2, 2, 6, 11, 15, 27, 34, (7)-6, 8, 11, 13, 14, 15, 20, 20,
- शाश्वतः-(1)-12, 12, 14, 26, (3)-9, 23, (4)-15, 20,
- सामुद्रिकः-(7) -15,
- साहसांकः-(1)-1,
- साहित्यदर्पणः-(2)-4,
- साहित्यरत्नाकरः-(1)-20, 23, (यज्ञनारायण दीक्षितः)
- हारावली-(4)-18, (6) 1.
सन्दर्भ ग्रन्थ-सूचि:
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Abhijnana Śakuntalam, Ed. S.K. Belvalkar, Pub. Sahity Akademi, New Delhi, 1965
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Patankar, P.N. (1902), TheAbhijnanaśakuntala, Poona: Shiralkar & Co, Boodhwar Peith, Poona.
Pischel, R. (1876] (Seond edition & 1922), Kalidāsa's Śakuntala, an Ancient Hindu Drama, Cambridge: Harvard University Press.
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248 चन्द्रशेखरचक्रवर्तिकृतसन्दर्भदीपिकया समलङ्कृतम्
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