भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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सर्ग ] हिन्दीटीकासहित (१७)

विमान स्मरण करते ही आकर प्राप्त हुआ ।। ११ ।। उसके ऊपर रामचन्द्र आदि सम्पूर्ण वीर चढ़े भरत लक्ष्मण शत्रुघ्न जो स्थित हुए ।। १२ ।।

सुग्रीव प्रमुखाः सर्वे वानराजितकाशिनः । विभीषणो महाबाहुः सह रक्षोगणैः प्रभुः ।। १३ ।। मात्रा पित्राप्यकथनादजानन्बोधितोनया । सीतया रामकार्यार्थं निर्ययौ राघवाज्ञया ।। १४ ।।

सुग्रीवको आदि लेकर शत्रुको जीतनेवाले वानर तथा महाबाहुविभीषण राक्षसोंके सहित स्थित हुए ।। १३ ।। माता पिता आदिसे भी न कहकर इन जानकीके प्रेरे हुए रामचन्द्रकी आज्ञासे वे सब चले ।। १४ ।।

सुमंत्राद्या मंत्रिणश्च ऋषयस्ते च निर्ययुः । नानाशस्त्रप्रहरणा धृतायुधकलापिनः ।। १५ ।। मुमुचुस्ते सिंहनादं महाघोरं महाबलाः । धनुःशब्देन रामस्य सिंहनादेन चैव हि ।। १६ ।।

सुमन्त्रादि मन्त्री और वे सब ऋषि वहांसे चले; वे सब अनेक प्रकारके आयुध धारण कर बोलनेवाले ।। १५ ।। वे महाबली घोर सिंहनाद करने लगे, रामके धनुषशब्दसे और सिंहनादसे ।। १६ ।।

चचाल वसुधा शैलाश्चेलुः पेतुर्ग्रहाश्च खात् । नद्योऽशुष्यन्समुद्वेलाः सागराश्च चकंपिरे ।। १७ ।। सुग्रीवो हनुमान्नीलो जांबवान्नल एव च । ग्रसंत इव ते सर्वे निर्ययू रामशासनात् ।। १८ ।।

पृथ्वी और शैल चलायमान हो गये, तारे टूटने लगे, नदी सूखने लगी, सागरने मर्यादा छोडदी ।। १७ ।। सुग्रीव हनुमान् नील जाम्बवंत यह सब मानो आकाशको ग्रसते हुए चले ।। १८ ।।

स तया सीतया सार्धं रामचन्द्रो महाबलः । कामगं पुष्पकं दिव्यमारुरोह धनुर्धरः ।। १९ ।। पुष्पकं ते समारुह्य सर्व एव महाबलाः । सीतया भ्रातृभिः सार्द्धं रामचन्द्रं महाबलाः ।। २० ।।

फिर सीताके सहित महाबली रामचन्द्र धनुष धारण किये कामगामी पुष्पक विमानमें स्थित हुए ।। १९ ।। वे सब महाबली पुष्पकविमानमें स्थित होकर सीता और भाइयोंके सहित रामचन्द्र स्थित हुए ।। २० ।।

प्रोत्साहयंतो वचनैर्नियर्युजितकाशिनः । रामाज्ञया पुष्पकं तदा-