अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
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. शंकुकर्ण, पिटरक, कुटीरमुख, सेचक, पूर्णमुख, भाष, शकुलि,हरि ॥ ४९ ॥ अमाहिठ, कामठक, सुषेण, मानस, व्यय; भैरव, मुण्ड, देवांग, चोडपालक ॥ ५० ॥
ऋषभो वेगवान्नाम पिंडारकमहाहनू ॥ रक्तांगः सर्वसारंगः समृद्धः पाटवाकसौ ॥ ५१ ॥ वराहको रावणकः सुचित्रश्चित्रवेगिकः ॥ पराशरस्तरुणिको मणिस्कन्धस्तथारुणिः ॥ ५२ ॥
ऋषभ, वेगवान्, पिण्डारक, महाहनु, रक्तांग, सर्वसारङ्ग, समृद्ध, पाट, वासक ॥ ५१ ॥ वराहक, रावणक, सुत्रिच, चित्रवेगिक, पराशर, तरुणिक, मणिस्कंध, अरुणि ॥ ५२ ॥
सेनाध्यक्षा महाब्रह्मन्कीर्तिताः कीर्तिवर्धनाः ॥ प्राधान्येन बहुत्वात्तु न सर्वे परिकीर्तिताः ॥ ५३ ॥ न शक्याः परिसंख्यातुं ये युद्धाय समागताः॥नीलरक्ता सिता घोरा महाकाया महाबलाः ॥ ५४ ॥
हे ब्रह्मन् ! यह महाकीर्तिवर्द्धन सेनाध्यक्ष कहे हैं प्रधानभी बहुत हैं, विस्तारके कारण सबका वर्णन नहीं किया ॥ ५३ ॥ युद्ध करनेको आये थे उनकी संख्या नहीं हो सकती, नील रक्त सित घोर महाकाय महाबली ॥ ५४ ॥
सप्तशीर्षाद्विशीर्षाश्च पञ्चशीर्षास्तथापरे । कालानलमहाघोरा हुताशसमविग्रहाः ॥ ५५ ॥ महाकाया महावेगाः शैलशृंगसमुच्छ्रयाः । योजनायामविस्तीर्णाद्वियोजनसमुच्छ्रयाः ॥ ५६ ॥
सात शिरके दो शिरके पांचशिरके कालानलके समान महाघोर अग्निके समान शरीरवाले ॥ ५५ ॥ महाकाय महावेगवान् शैलशृंगके समान ऊंचे एक योजनके चौड़े दो योजनके ऊंचे ॥ ५६ ॥
कामरूपाः कामबला दीप्तानलसमत्विषः । अन्ये च बहवः शूराः शूलपट्टिशधारिणः ॥५७॥ दिव्यप्रहरणोपेता नानावेषविभूषिताः ॥ शृणु नामानि चान्येषां येऽन्ये रावणसैनिकाः ॥ ५८ ॥
कामरूपी कामबली दीप्त अनलके समान कान्तिमान् और भी बहुतसे शूर शूल पट्टिश लिये ॥ ५७ ॥ दिव्य प्रहारसे नाना युक्त वेषसे विभूषित थे, रावणके सेनापतियोंके नाम सुनो ॥ ५८ ॥
शंकुकर्णोनिकुम्भश्च पद्मः कुमुद एव च ॥ अनन्तो द्वादशभुजस्तथा कृष्णोपकृष्णकौ ॥ ५९ ॥ घ्राणश्रवाः कपिस्कंधः कांचनाक्षो जलन्धमः ॥ अक्षसंतर्दनो ब्रह्मन्कुनदीकस्तमोऽभ्रकृत् ॥ ६० ॥