अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( १०० ) अद्भुतरामायण [ अष्टादश-
नहीं तो राक्षसोंके सिवाय पृथ्वीमें और किसीको न रखता, सूर्य चन्द्रमा होकर मैं ही तिथिका प्रणयन करता ॥ ३९ ॥ मेघपन, इन्द्रपन, पृथ्वीको सेकादि क्रिया, यमत्व अग्नित्व वरुणंत्व कुबेरत्व मैं ही कर सकता हूं ॥ ४० ॥
इत्येवं बहुधा गर्जन्नाजगामांतिकं हरेः ॥ सेनाध्यक्षा राक्षसेंद्रा राज्ञा सार्द्धं सामागताः ॥ ४१ ॥ नानाप्रहरणोपेता नानारथपदातिनः ॥ एकैकस्यापि पर्याप्ता जगती नेति मन्महे ॥ ४२ ॥
इस प्रकार अनेक प्रकारसे गर्जना करता हुआ रामके समीप आया, सेनाध्यक्ष राक्षसेन्द्र राजाके साथ आये ॥ ४१ ॥ यह सब नाना प्रकारके प्रहार लिये अनेक रथ पैदलोंसे युक्त एक ऐसे वीर थे कि, पृथ्वीमें वलसे नहीं समा सकते थे ।४२।
केषांचिदपि नामानि भारद्वाज निबोध मे ॥ कोटिशो मनसः पूर्णः शलः पालो हलीमुखः ॥ ४३ ॥ पिच्छलः कौणपश्चक्रः कालवेगः प्रकाशकः ॥ हिरण्यबाहुः शरणः कक्षकः कालदन्तकः ॥ ४४ ॥
हे भरद्वाज ! उनमें कुछेकके नाम मुझसे सुनो । कोटिश, मनस, पूर्ण, शल, पाल, हलीमुख ॥ ४३ ॥ पिच्छल, कौणप, चक्र, कालवेग, प्रकाशक, हिरण्यबाहु, शरण, कक्षक, कालदन्तक ॥ ४४ ॥
पुच्छाण्डको मंडलकः पिंडसेक्ता रभेणकः ॥ उच्छिखः करभो भद्रो विश्वजेता विरोहणः ॥ ४५ ॥ शिली शलकरो मूकः सुकुमारः प्ररेषणः ॥ मुद्गरः शशरोमा च सुरोमा च महाहनुः ॥ ४६ ॥
पुच्छाण्डक, मण्डलक, पिण्डसेक्ता, रभेणक, उच्छिख, करभ, भद्र, विश्वजेता, विरोहण ॥ ४५ ॥ शिली, शलकर, मूक, सुकुमार, प्ररेषण, मुद्गर, शशरोमा, सुरोमा, महामनु ॥ ४६ ॥
पारावतः पारियात्रः पांडुरो हरिणः कृशः ॥ विहंगः शरभो दक्षः प्रमोदः सहपातनः ॥ ४७ ॥ कृकरः कुण्डरो वैणीवेणीस्कंधः कुनारकः ॥ बाहुकः शंखवेगश्च धूर्त्तकः पातपातको ॥ ४८ ॥
पारावत, पारियात्र, पाण्डुर, हरिण, कृश, विहंग, शरभ, दक्षप्रमोद, सहातापन ॥ ४७ ॥ कृकर, कुंडर वैणी, वेणीस्कंद, कुमारक, बाहुक, शंखवेग धूर्त्तक, पात, पातक ॥ ४८ ॥
शंकुकर्णः पिटरकः कुटीरमुखसंचकौ ॥ पूर्णांगदः पूर्णमुखः प्रभाषः शकुलिर्हरिः ॥ ४९ ॥ अमाहिठः कामठकः सुषेणो मानसो व्ययः ॥ भैरवो मुण्डदेवांगः पिशंगश्चोडपालकः ॥ ५० ॥