भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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सर्ग ] हिन्दीटीकासहित (१०३)

गायन, दमन, वाण, वीर्यवान्, खड्ग वैताली, गतिताली, कथक वोतिक ॥ ६९ ॥ हंसज, पंकदिग्धांग, समुद्र, उन्मादन, रणोत्कट, प्रहास, वेतसिद्ध नन्दक ॥ ७० ॥

एते पुरा रावणसैन्यपाला नानायुधप्राहरणा रणेषु ॥ हंसेषु मेषेषु वृषेषु वीरा रामं प्रतस्थुः कृतसिंहनादाः ॥ ७१ ॥

इत्यार्षे श्रीमद्रा. वा. अद्भुतोत्तरकाण्डे रावण सैन्यनिर्याणं नामाष्टादशः सर्गः ॥ १८ ॥

यह रावणके सेनापति युद्धमें अनेक प्रकारके प्रहार करनेवाले हंस मेष वृषके ऊपर चढे सिंहनाद करते रामसे युद्ध करनेको चले ॥ ७१ ॥

इत्यार्षे श्रीमद्रा. वा. आ. अ. भाषाटीकायां रावणसैन्यनिर्माणं नामाष्टादश सर्गः ॥ १८ ॥


एकोनविंश सर्ग

सहस्रमुखी रावणके पुत्रोंका युद्धको चलना

रावणस्यौरसाः पुत्रास्सह राक्षसपुंगवैः ॥ नानाप्रहरणोपेता दुद्रुवू राघवं रणे ॥ १ ॥ नामान्येषां प्रवक्ष्यामि भरद्वाज शृणुष्व मे ॥
कालकण्ठः प्रभाषश्च तथा कुम्भाण्डको परः ॥ २ ॥

रावणके औरस पुत्र महाराक्षसोंके साथमें अनेक प्रकारके प्रहार लेकर धावमान हुए ॥ १ ॥ हे भरद्वाज ! उनके नाम मैं कहता हूं सो तू मुझसे सुन; कालकण्ठ, प्रभाष, कुम्भांडक ॥ २ ॥

कालकक्ष शितश्चैव भूतलोन्मथनस्तथा ॥ यज्ञबाहुः प्रबाहुश्च देवयाजी च सोमदः ॥ ३ ॥ मज्जालश्च महातेजाः क्रथः क्राथोवसुव्रतः ॥ तुहरश्च तुहारश्च चित्रदेवश्च वीर्यवान् ॥ ४ ॥

कालकक्ष, शित, भूतल, उन्मथन, यज्ञबाहु, प्रवाहू देवयाजी, सोमप ॥ ३ ॥ महातेजस्वी, मज्जाल, क्रथ, क्राथ, वसुव्रत, तुहर, तुहार, वीर्यवान्, चित्रदेव ॥ ४ ॥


१ आरूढा इति शेषः ।