भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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(१०४) अद्भुतरामायण [ एकोनविंश-

मधुरः सुप्रसादश्च किरीटश्च महाबलः॥ वसनो मधुवर्णश्च कलशोदर एव च ॥ ५ ॥ धर्मदो मन्मथकरः सूचीवक्त्रश्च वीर्यवान् ॥ श्वेतवक्त्रः सुवक्त्रश्च चारुवक्त्रश्च पाण्डुरः ॥ ६ ॥

मधुर, सुप्रसाद, महाबली, किरीट, वसन, मधुवर्ण, कलशोदर ॥ ५ ॥ धर्मद, मन्मथकर, वीर्यवान्, सूचिवक्त्र श्वेतवक्त्र, सुवक्त्र, चारुवक्त्र, पाण्डुर ॥ ६ ॥

दण्डबाहुः सुबाहुश्च रजः कोकिलकस्तथा ॥ अचलः काल- काक्षश्च बालेशो बालभक्षकः ॥ ७ ॥ संचानकः कोकनदो गृध्रपत्रश्च जम्बुकः ॥ लोहाजवक्त्रो जवनः कुम्भवक्त्रश्च कुम्भकः ॥ ८ ॥

दण्डबाहु, सुबाहु, कोकिलक, अचल, कालाकाक्ष, बालेश, बालभक्षक ॥ ७ ॥ सञ्चानक, कोकनद, गृध्रपत्र, जम्बूक, लोहाजवक्त्र, जवन, कुम्भ- वक्त्र ॥ ८ ॥

मुंडग्रीवश्च कृष्णौजा हंसवक्त्रश्च कुंर्जरः ॥ एते रावणपुत्राश्च महावीरपराक्रमाः ॥ ९ ॥ बाहुशब्दैः सिंहनादैः पूरयंतो दिशो दश ॥ एषां सैन्यसहस्राणां सहस्राण्यर्बुदानि च ॥ १० ॥

मुंडग्रीव, कृष्णौजा, हंसवक्त्र, कुञ्जर, यह रावणके पुत्र महाबली और पराक्रमी थे ॥ ९ ॥ बाहुशब्द और सिंहनादसे दशों दिशाओंको पूर्ण करते हुए, इनकी सेनाके सहस्रों और अर्बों ॥ १० ॥

नानाकृतिवयोरूपा विविधायुधपाणयः ॥ कूर्मकुक्कुटवक्त्राश्च सर्पजम्भकवक्त्रकाः ॥ ११ ॥ गोमायुमुखवक्त्राश्च शशोलूकमुखा- स्तथा ॥ खरोष्ट्रवदनाश्चैव वराहवदनास्तथा ॥ १२ ॥

अनेक प्रकारकी आकृति वय रूपवाले अनेक आयुध हाथमें लिये, कूर्म कुक्कुटमुखवाले सर्प जम्भकसे मुखवाले ॥ ११ ॥ शृगालमुखवाले शशक और खरगोशके मुखवाले, खर उष्ट्र तथा वराहके मुखवाले ॥ १२ ॥

मनुष्यमेषवक्त्राश्च शृगालवदनास्तथा ॥ मार्जारशशवक्त्राश्च दीर्घवक्त्राश्च केचन ॥ १३ ॥ नकुलोलूकवक्त्रश्च काकवक्त्रास्तथा- परे ॥ आखुबभ्रुकवक्त्राश्च मयूरवदनातस्था ॥ १४ ॥

मनुष्य मेष शृगाल मार्जार शशाके मुखवाले, कोई दीर्घमुख ॥ १३ ॥ नकुल, उलूकमुख, काक, आखु, बभ्रुमुख, मोरमुख ॥ १४ ॥