भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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सर्ग ] हिन्दीटीकासहित (१०५)

मत्स्यमेषाननाश्चैव अजाविमहिषाननाः ।। ऋक्षशार्दूलवक्त्राश्च द्वीपिंसिहाननास्तथा ।। १५ ।। भीमा गजाननाश्चैव तथा नक्रमुखा- स्तथा ।। गोखरोष्ट्रमुखाश्चान्ये वृषदंशमुखास्तथा ।। १६ ।। मत्स्य मेष अजा मुखवाले ऋक्ष, शार्दूल द्वीप, और सिंहमुखवाले ।। १५ ।। भयंकर हाथीकेसे मुखवाले, नाकेके समान मुखवाले, गो, खर उष्ट्र वृष दंष्ट्रमानस के मुखवाले ।। १६ ।।

महाजठरपापांगाः स्तवकाक्षाश्च दुर्मुखाः ।। पारावतमुखाश्चान्ये तथा वृषमुखाः परे ।। १७ ।। कोकिलाभाननाश्चान्ये श्येनतित्तिरिका- ननाः ।। कृकलासमुखाश्चैव विरजोऽम्बरधारिणः ।। १८ ।। महाजठरेपाद अंगवाले, स्तवकाक्ष, दुर्मुख, पारावतमुख, वृषमुख ।। १७ ।। कोकिलाम्रख, तित्तिरि मुख, कृकलासमुख, श्वेतवस्त्र धारण किये ।। १८ ।।

व्यासवक्त्राः शुकमुखाश्चंडवक्त्राः शुभाननाः ।। आशीविषाश्चीर- धरा गोनासावरणास्तथा ।। १९ ।। स्थूलोदराः कृशांगाश्च स्थूलां- गाश्च कृशोदराः ।। ह्रस्वग्रीवा महाकर्णा नानाव्यालविभूषणाः ।।२०। व्यालमुख शुकमुख, चण्डमुख, शुभानन, आशीविष, चीरबारी, गोनासाव- रण ।। १९ ।। स्थूलोदर, कृशांग, कृशोदर, ह्रस्वग्रीव, महाकर्ण अनेक व्यालके भूषणवाले ।। २० ।।

गजेंद्रचर्मवसनास्तथा कृष्णाजिनांबराः ।। स्कंधेमुखा द्विजश्रेष्ठ तथा ह्युदरतोमुखाः ।। २१ ।। पृष्ठेमुखा हनुमुखास्तथा जंघामुखा- स्तथा ।। पार्श्वाननाश्च बहवो नानादेशमुखास्तथा ।। २२ ।। गजेन्द्रके चर्मका वस्त्र पहरे, काले वस्त्रधारे, स्कंधमें मुखवाले, उदरमें मुखवाले ।। २१ ।। पीठमें मुखवाले हनुमुख, जंघामुख, पार्श्वानन नानादेशमें मुखवाले ।। २२ ।।

तथा कीटपतंगानां सदृशास्या महाबलाः ।। नानाव्यालमुखा- श्चान्ये बहुबाहुशिरोधराः ।। २३ ।। नानावक्षोभुजाः केचिद्भुजंग- वदनाः परे ।। खड्गमुखा वृकमुखा अपरे गरुडाननाः ।। २४ ।। कीट पतंगोंके समान मुखवाले, महाबली, सर्वमुखवाले, बहुत बाहु और शिरवाले ।। २३ ।। अनेक छाती भुजावाले, कोई भुजंगमुख, खड्ग, वृक गरुडके समान मुखवाले ।। २४ ।।