भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

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(१०६) अद्भुतरामायण [ एकोनविंश -

चोलसंवृतगात्राश्च नानाफलकवाससः ॥ नानावेषधराश्चान्ये नानामाल्यानुलेपनाः ॥ २५ ॥ नानावस्त्रधराश्चान्ये चर्मवासस एव च ॥ उष्णीषिणो मुकुटिनः कंबुग्रीवाः सुवर्चसः ॥ २६ ॥

कुरतोंसे शरीर ढके फलक वस्त्रवाले, नानावेषधारी नानामालाओंका अनुलेपन लगाये, नाना वेषधारी अनेक माला और अनुलेपन लगाये ॥ २५ ॥ नानावस्त्र और चर्म धारण किये पगडी मुकुटवाले शंखकेसी गर्दन सुन्दर कान्तिवाले ॥ २६ ॥

किरीटिनः पंचशिखास्तथा कठिनमूर्द्धजाः ॥ त्रिशिखा द्विशिखाश्चैव तथा सप्तशिखा अपि ॥ २७ ॥ शिखण्डिनोऽमुकुटिनो मुंडाश्च जटिलास्तथा ॥ चित्रमालाधराः केचित्केचिद्रोमाननास्तथा ॥ २८ ॥

किरीटधारी, पंचशिख, कठिन केशवाले, तीन शिखा और दो शिखावाले सात शिखावाले ॥ २७ ॥ शिखण्डी, मुकुटरहित, मुण्ड जटिल, चित्रमालाधारी कोई रोमानन ॥ २८ ॥

विग्र*हैकवशा नित्यमजेयाः सुरसप्तमैः॥ कृष्णा निर्मंसवक्त्राश्च दीर्घपृष्ठा *निरूदराः ॥ २९ ॥ दीर्घपृष्ठा स्थूलपृष्ठाः प्रलम्बोदरमेहनाः ॥ महाभुजा ह्रस्वभुजा ह्रस्वगात्राश्च वामनाः ॥ ३० ॥

युद्धमें देवताओंको अजय, काले निर्मंस मुख, दीर्घपृष्ठ, और उदरवाले ॥ २९ ॥ दीर्घपृष्ठ, स्थूलपृष्ठ, प्रलम्ब उदर और मेहनवाले, महाभुज, ह्रस्वभुज, ह्रस्वगात्र, वामन (बौने) ॥ ३० ॥

कुब्जाश्च ह्रस्वजंघाश्च हस्तिकर्णशिरोधराः ॥ हस्तिनासाः कूर्मनासा वृकनासास्तथापरे ॥ ३१ ॥ वारणेन्द्रनिभाश्चान्ये दीप्तिमंतः स्वलंकृताः ॥ पिंगाक्षाः शंकुकर्णाश्च वक्रनासास्तथापरे । ३२ । पृथुदंष्ट्रा महादंष्ट्राः स्थूलोष्ठा हरिमूर्द्धजाः ॥ नानापादौष्ठदंष्ट्राश्च नानाहस्तशिरोधराः ॥ ३३ ॥ नानाचर्मभिराच्छन्ना नानावासाश्च सुव्रत ॥ हृष्टाः परिपतन्ति स्म महापरिघ बाहवः ॥ ३४ ॥

कुबडे, ह्रस्वजंघ, हाथीकेसे कान और शिरवाले, हस्तिनास, कूर्मनास वृकनास, ॥ ३१ ॥ कोई वारणेन्द्रके समान, दीप्तिमान्, अलंकृत, पिंगाक्ष, शंकुकर्ण, वक्रनास ॥ ३२ ॥ पृथुदंष्ट्र, महादंष्ट्र, स्थूलोष्ठ, हरिकेश, नानाचरण


* विग्रहो युद्धम् * दीर्घत्वमार्षम् ।