अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
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धना सुप्रसादा च भवदा च जनेश्वरी ॥ एडी भेडी समेडी च वेतालजननी तथा ॥ ३७ ॥ कंदुतिः कंदुका चैव वेदमित्रा सुदेविका ॥ लम्बास्या केतकी चैव चित्र सेना चलाचला ॥ ३८ ॥
धनदा सुप्रसादा भवदा जनेश्वरी एडी समेडी भेडी वेतालजननी ॥ ३७ ॥ कंदुति कन्दुका वेदमित्रा सुदेविका लम्बास्या केतकी चित्रसेना चला अचला ३८
कुक्कुटिका शृंखलिका तथा शंकुलिका हडा ॥ कन्दालिका काकलिका कुंभिकाथ शतोदरी ॥ ३९ ॥ उत्क्राथिनी जवेला च महावेगा च कंकिनी ॥ मनोजवा कटकिनी प्रघसा पूतना तथा । ४० ।
कुक्कुटिका शृंखलिका संकुलिखा हडा कंदालिका काकलिका कुंभिका शतोदरी ॥ ३९ ॥ उत्क्राथिनी जवेला महावेगा कंकिनी मनोजवा कटकिनी प्रघसा पूतना ॥ ४० ॥
खेशया चातिद्रढिमा क्रोशनाथत दित्प्रभा ॥ मंदोदरी च तुंडीच कोटरा मेघवाहिनी ॥ ४१ ॥ सुभगा लंबिनी लंबा बहुचूडा विकत्थिनी ॥ ऊर्ध्ववेणीधरा चैव पिंगाक्षी लोहमेखला ॥ ४२ ॥
खेशया अतिद्रढिमा क्रोशना तडित्प्रभा मन्दोदरी तुंडी कोटरा मेघवाहिनी ॥ ४१ ॥ सुभगा लम्बिनी लम्बा वहुचूडा विकत्थिनी ऊर्ध्ववेणीधरा पिंगाक्षी लोहमेखला ॥ ४२ ॥
पृथुवक्त्रा मधुलिहा मधुकुंभा तथैव च ॥ यक्षाणिका मत्सरिका जरायुर्जर्जरानना ॥ ४३ ॥ ख्यातां डहडहा चैव तथा धमधमा द्विजा ॥ खंडखंडा पृथुश्रोणी पूषणामणि कुट्टिका ॥ ४४ ॥
पृथुवक्त्रा मधुलिहा मधुकुंभा यक्षणिका मत्सरिका जरायु जर्जरानना ॥ ४३ । ख्याता दहपहा धमधमा खण्डखण्डा पृथुश्रेणी पूषणा मणिकुट्टिका ॥ ४४ ॥
अम्लोचा चैव निम्लोचा तथा लंबपयोधरा ॥ वेणुदीणाधरा चैव पिंगाक्षी लोहमेखला ॥ ४५ ॥ शशोलूकमुखी दृष्ट्वा खरजंघा महाजरा ॥ शिशुमारमुखी श्वेता लोहिताक्षी विभीषणा ॥ ४६ ॥
अम्लोचा निम्लोचा पलोधरा वेणुवीणाधरा पिंगाक्षी लोहमेखला ॥ ४५ ॥ शशोलूकमुखी हृष्टा खरजंघा महाजरा शिशुरामुखी श्वेता लोहिताक्षी बिभीषणा ॥ ४६ ॥