अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
पृष्ठ 133, कुल 173 में से
संदर्भ में पढ़ें( १२६ ) अद्भुतरामायण [ त्रयोविंशति-
जटालीका कामचरी दीर्घजिह्वाबलोत्कटा ।। कालाहिकाया मालीका मुकुटामुकुटेश्वरी ।। ४७ ।। लोहिताक्षी महाकाया हवि- ष्पिण्डा च पिण्डिका ।। एकत्वचा सुकूर्म्मा च कुल्लाकर्णि च कर्णिका ।४८
जटालीका कामचारी दीर्घजिह्वा बलोत्कटा कालाहिका मालीका मुकुटा मुकुटेश्वरी ॥ ४७ ॥ लोहिताक्षी महाकाया हविष्पिण्डा पिण्डिका एकत्वचा सुकूर्मा कुल्लाकर्णी कर्णिका ॥ ४८ ॥
सुरकर्णी चतुष्कर्णी कर्णप्रावरणा तथा ।। चतुष्पथनिकेता च गोकर्णी महिषानना ।। ४९ ।। खरकर्णी महाकर्णी भेरीस्वनमहा- स्वना ।। शंखकुंभश्रवा चैव भगदा च महाबला ।। ५० ।।
सुरकर्णी चतुष्कर्णी कर्णप्रावरणा चतुष्पथ निकेता गोकर्णी महिषानना ॥ ४९ ॥ खरकर्णी महाकर्णी भेरीस्वना महास्वना शंखकुम्भश्रवा भगदा महाबला ॥ ५० ॥
गणा च सुगणा चैव कामदाप्यथ कन्यका ।। चतुष्पथरता चैव भूतितीर्थान्यगोचरा ।। ५१ ।। पशुदा विबुदा चैव सुखदा च महा- यशाः ।। पयोदा गोमहिषदा सुविशाला चतुर्भुजा ।। ५२ ।।
गणा सुगणा कामदा कन्यका चतुष्पथ रता भूतितीर्था अन्यगोचरा ॥ ५१ ॥ पशुदा विबुदा सुखदा महयशा पयोदा गोमहिषदा सुविशाला चतुर्भुजा ॥ ५२ ॥
प्रतिष्ठा सुप्रतिष्ठा च रोचमाना सुलोचना ।। नौकर्णी मुखकर्णी च विशिरा मंथिनी तथा ।। ५३ ।। एकवक्त्रा मेघरवा मेघवामा द्विरो- चना ।। एताश्चान्याश्च बहवो मातरः कोटिकोटिशः ।। ५४ ।।
प्रतिष्ठा सुप्रतिष्ठा रोचमाना सुलोचना नौकर्णी मुखकर्णी विशिरा मंथिनी ॥ ५३ ॥ एकमुखी मेघरवा मेघवामा द्विरोचना इसके सिवाय और भी अनेकों मातायें थीं ॥ ५४ ॥
असंख्याताः समाजग्मुःक्रीडितुं सीतया सह ।। दीर्घवक्ष्यो दीर्घदंत्यो दीर्घतुंड्यो द्विजोत्तम ।। ५५ ।। सरसा मधुराश्चैव यौवनस्थाः स्वलं- कृताः ।। माहात्म्येन च संयुक्ताः कामरूपधरास्तथा ।। ५६ ।।
वे असंख्य जानकीके साथ क्रीडा करनेको आई, दीर्घ वक्षस्थलवाली, दीर्घ दांतोंवाली, दीर्घनासिकावाली ॥ ५५ ॥ सरस मधुर यौवनमती स्वलंकृत- महिमासे संयुक्त कामरूपधारिणी ॥ ५६ ॥