अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
पृष्ठ 145, कुल 173 में से
संदर्भ में पढ़ें( १३८ ) अद्भुतरामायण [ पञ्चविंशति-
क्षेत्रज्ञा शक्तिरव्यक्तलक्षणा मलवर्जिता ॥ अनादिमायासंभिन्ना त्रितत्त्वा प्रकृतिर्गुणः १४० ॥ ३५ ॥ महामाया समुत्पन्ना तामसी पौरुषं ध्रुवा ॥ व्यक्ताव्यक्तात्मिका कृष्णा रक्तशुक्लाप्रसूतिका ३६ क्षेत्रकी जाननेवाली, शक्ति अव्यक्तलक्षणा, मलसे वर्जित्, अनादिमायासे संभिन्न, त्रितत्त्वा प्रकृति गुणस्वरूप १४० ॥ ३५ ॥ महामायासे समुत्पन्न तामसी ध्रुव पुरुषार्थवाली, व्यक्त अव्यक्तात्मिका, कृष्णाशुक्लप्रसूतिका ३६
स्वकार्या १५० कार्यजननी ब्रह्मास्या ब्रह्मसंश्रया ॥ व्यक्ता प्रथ- मजा ब्राह्मी महती ज्ञानरूपिणी ॥ ३७ ॥ वैराग्यैश्वर्यधर्मात्मा ब्रह्म मूर्ति १६० हृदिस्थिता ॥ जयदा जित्वरी जैत्री जयश्रीर्जयशालिनी ३८ स्वकार्या १५० कार्यकी जननी, ब्रह्मके आश्रयभूत (ब्रह्मसंश्रयवाली) प्रगट, प्रथम उत्पन्न होनेवाली, ब्राह्मी, महती, ज्ञानरूपिणी ॥ ३७ ॥ वैराग्य, ऐश्वर्य धर्मात्मा, ब्रह्ममूर्ति १६०, हृदयमें स्थित, जयदाता, शीघ्र जीतनेवाली, जैत्री, जयलक्ष्मी, जययुक्त ॥ ३८ ॥
सुखदा शुभदा सत्या शुभा १७० संक्षोभकारिणी ॥ अपां योनिः स्वयंभूतिर्मानसी तत्त्वसंभवा ॥ ३९ ॥ ईश्वराणी च शर्वाणी शंकरा- र्द्धशरीरिणी ॥ भवानी चैव रुद्राणी १८० महालक्ष्मीरथांबिका ४० सुखदायक, शुभदायक, शुभा १७०, संक्षोभ करनेवाली, जलोंकी योनि, स्वयंभूति, मानसी, तत्त्वसंभवा ॥ ३९ ॥ ईश्वराणी, शर्वाणी, शंकरके अर्द्धशरीरवाली भवानी, रुद्राणी १८० महालक्ष्मी, अम्बिका ॥ ४० ॥
माहेश्वरी समुत्पन्ना भुक्तिमुक्तिफलप्रदा ॥ सर्वेश्वरी सर्ववर्णा नित्या मुदितमानसा ॥ ४१ ॥ ब्रह्मेंद्रोपेंद्रनमिता शंकरेच्छानुवर्तिनी १९० ॥ ईश्वराद्धासिनगता रघूत्तमपतिव्रता ॥ ४२ ॥ माहेश्वरी, प्रगट होनेवाली, भुक्ति मुक्तिका फल देनेवाली, सर्वेश्वरी, सुवर्णयुक्ता, नित्या, मुदित मनवाली ॥ ४१ ॥ ब्रह्मा इन्द्र उपेन्द्रसे निमत, शंकरकी इच्छासे वर्तनेवाली १९० ईश्वरके अर्धआसनमें प्राप्त, रघुश्रेष्ठकी पतिव्रता ॥ ४२ ॥
सकृद्विभाविता सर्वा समुद्रपरिशोषिणी ॥ पार्वती हिमवत्पुत्री परमानन्ददायिनी ॥ ४३ ॥ गुणाढ्या योगदा २०० योग्या ज्ञान- मूर्तिर्विकाशिनी ॥ सावित्री कमला लक्ष्मीश्रीननंतोरसि स्थिता ४४ ।