अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
पृष्ठ 149, कुल 173 में से
संदर्भ में पढ़ें( १४२ ) अद्भुतरामायण [ पंचविंशति
स्थित, त्रिनेत्रा, स्वर्णमें स्थित, संपूर्ण इन्द्रिय और मनकी माता, सब भूतोंके हृदयमें स्थित ॥ ७० ॥
संसारतारिणी विद्या ब्रह्मवादिमनोलया ॥ ब्रह्माणी बृहती ४१० ब्राह्मी ब्रह्मभूता भयावनिः ॥ ७१ ॥ हिरण्मयी महारात्रिः संसारपरिवर्तिका ॥ सुमालिनी सुरूपा च तारिणी भाविनी ४२० प्रभा ७२
संसारसे तारनेवाली, विद्या, ब्रह्मवादिनी, मनोलया, ब्रह्माणी, बृहती, ४१० ब्राह्मी, ब्रह्मभूता, भयावनी ॥ ७१ ॥ हिरण्मयी, महारात्री, संसारका परिवर्तन करनेवाली, सुमालिनी, सुरूपा, तारिणी, भाविनी ४२० प्रभा । ७२ ।
उन्मीलनी सर्वसहा सर्वप्रत्ययसाक्षिणी ॥ तपनी तापिनी विश्वा भोगदा धारिणीं धरा ४३० ॥ ७३ ॥ सुसौम्या चंद्रवदना तांडवासक्तमानसा ॥ सत्त्वशुद्धिकरी शुद्धिमलत्रयविनाशिनी ॥ ७४ ॥
उन्मीलनी, सर्वसहा, सब प्रत्ययकी साक्षिणी, तपनी, तापिनी, विश्वा, भोगदा धारिणी, धरा ४३० ॥ ७३ ॥ सुंसौम्या, चन्द्रवदना, तांडवमें प्रसन्न मनवाली, सत्वशुद्धिकारी, शुद्धि, तीनों मलका नाश करनेवाली ॥ ७४ ॥
जगत्प्रिया जगन्मूर्तिस्त्रिमूर्तिरमृताश्रया ४४० ॥ निराश्रया निराहारा निरंकुशरणोद्भवा ॥ ७५ ॥ चक्रहस्ता विचित्रांगी स्रग्विणी पद्मधारिणी ॥ परापरविधानज्ञा महापुरुषपूर्वजा ॥ ७६ ॥
जगत्प्रिया, जगत्की मूर्ति, त्रिमूर्ति, अमृताश्रया ४४९ निराश्रया, निराहारा, निरंकुशा रणोद्भवा ॥ ७५ ॥ चक्रहस्ता, विचित्रांगी, स्रग्विणी, पद्मधारिणी, परा, परविधानकी जाननेवाली, महापुरुषोंसे भी पूर्व होनेवाली ॥ ७६ ॥
विश्वेश्वरप्रिया ४५० ऽविद्या विद्युज्जिह्व जितश्रमा ॥ विद्यामयी सहस्राक्षी सहस्रश्रवणात्मजा ॥ ७७ ॥ सहस्ररश्मिपद्मस्था महेश्वरपदाश्रया ॥ ज्वालिनी ४६० सद्मना व्याप्ता तैजसी पद्मरोधिका ॥ ७८ ॥
विश्वेश्वरप्रिया, ४५० अविद्या विद्युतजिह्वा, श्रमरहिता, विद्यामयी, सहस्राक्षी-सहस्र श्रवणकी आत्मजा ॥ ७७ ॥ सहस्र रश्मि, पद्मस्था, महेश्वरपदाश्रया, ज्वालिनी ६४० पद्म करके व्याप्त, तैजसी, पद्मरोधिका । ७८