भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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सर्ग ]         हिन्दीटीकासहित        (१४३)

महादेवाश्रया मान्या महादेवमनोरमा ।। व्योमलक्ष्मीः सिंहरथा चेकिता न्यमितप्रभा ४७० ।। ७९ ।। विश्वेश्वरी विमानस्था विशोका शोकनाशिनी ।। अनाहता कुण्डलिनी नलिनी पद्मवासिनी ।। ८० ।। महादेवके आश्रयवाली, मान्या, महादेवके मनको रमानेवाली, व्योमलक्ष्मी, सिंहरथा, चेकितानी, अमितप्रभा ४७० ।। ७९ ।। विश्वकी स्वामिनी, विमानमें स्थित, विशोका, शोकनाशिनी, अनाहता, कुण्डलिनी, नलिनी, पद्मवासिनी, ।। ८० ।।

शतानन्दा सतां कीर्तिः ४८० सर्वभूताशयस्थिता ।। वाग्देवता ब्रह्मकला कलातीता कलावती ।। ८१ ।। ब्रह्मर्षिर्ब्रह्महृदया ब्रह्म विष्णुशिवप्रिया ।। व्योमशक्तिः क्रियाशक्ति ४९० र्जनशक्तिः परागतिः ।। ८२ ।। शतानन्दा, सत्पुरुषोंकी कीर्ति ४८० सब भूतोंके आशयमें स्थित, वाग्देवता, ब्रह्मकला, कलातीता, कलावती ।। ८१ ।। ब्रह्मर्षि, ब्रह्महृदया, ब्रह्मा, विष्णु शिवकी प्यारी, व्योमशक्ति ; क्रियाशक्ति ४९० जनशक्ति, परमगति ।। ८२ ।।

क्षोभिका रौद्रिका भेद्या भेदाभेदविवर्जिता ।। अभिन्ना भिन्न- संस्थाना वंशिनी वंशहारिणी ५०० ।। ८३ ।। गुह्यशक्तिर्गुणातीता सर्वदा सर्वतोमुखी ।। भगिनी भगवत्पत्नी सकला कालकारिणी । ८४ । क्षोभिका, रौद्रिका, भेद्या, भेद अभेदसे वर्जित, अभिन्न, भिन्नसंस्थावाली, वंशिनी, वंशहारिणी ५०० ।। ८३ ।। गुह्यशक्ति, गुणातीता, सर्वदा, सर्वतो- मुखी, भगिनी, भगवत्पत्नी सकला, कालकारिणी ।। ८४ ।।

सर्ववित्सर्वतोभद्रा ५१० गुह्यातीता गुहावलिः ।। प्रक्रिया योग- माता च गंधा विश्वेश्वरेश्वरी ।। ८५ ।। कपिला कपिलाकांता कन- काभा कलांतरा ५२० पुण्या पुष्करिणी भोक्त्री पुरंदरपुरः सरा ८६ सबकी जाननेवाली, सब ओरसे मंगल दायक ५१० गुह्यसे अतीत, गुहा- वलि, प्रक्रिया, योगमाता, गन्धा, विश्वेश्वरेश्वरी ।। ८५ ।। कपिला, कपिला- कान्ता, कनकाभा, कलान्तरा ५२० पुण्या, पुष्करिणी, भोक्त्री, पुरन्दर- पुरस्सरा ।। ८६ ।।

पोषणी परमैश्वर्यभूतिदा भूतिभूषणा ।। पंचब्रह्मसमुत्पत्तिः परमा- त्मात्मविग्रहा ।। ८७ ।। नर्भोदया ५३० भानुमती योगिज्ञेया मनो- जवा ।। बीजरूपा रजोलूपा वशिनी योगरूपिणी ।। ८८ ।।