भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

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(१४४) अद्भुतरामायण [ पंचविंशति-

पोषणी, परमैश्वर्य विभूतीकी देनेवाली, भूषणा, पञ्च ब्रह्मसे उत्पन्न होनेवाली, परमात्मा, आत्मविग्रहा ॥ ८७ ॥ नर्मोदया ५३०, भानुमती योगिज्ञेया, मनोजवा, वशिनी, योगरूपिणी ॥ ८८ ॥

सुमंत्रा मंत्रिणी पूर्णा ५४०, ह्लादिनी क्लेशनाशिनी ॥ मनोहरीर्मनोरक्षी तापसी वेदरूपिणी ॥ ८९ ॥ वेदशक्तिर्वेदमाता वेदविद्या प्रकाशिनी ॥ योगेश्वरेश्वरी ५५० माला महाशक्तिर्मनोमयी । ९० ।

सुमन्त्रा, मंत्रिणी, पूर्णा ५४० ह्लादिनी, क्लेशनाशिनी, मनोहरी, मनोरक्षी, तापसी वेदरूपिणी ॥ ८९ ॥वेदशक्ति, वेदमाता, वेदविद्याकी प्रकाश करनेवाली, योगेश्वरोंकी ईश्वरी ५५० माला, महाशक्ति, मनोमयी, ॥ ९० ॥

विश्वावस्था वीरमुक्तिर्विद्युन्माला विहायसी ॥ पीवरी सुरभी वंद्या ५६० नंदिनी नन्दवल्लभा ॥ ९१ ॥ भारती परमानन्दा परापरविभेदिका ॥ सर्वप्रहरणोपेता काम्या कामेश्वरेश्वरी ॥ ९२ ॥

विश्वावस्था, वीरमुक्ति, विद्युन्माला, विहायसी, पीवरी, सुरभी-वन्द्या ५६०, मन्दिनी, नन्दवल्लभा ॥ ९१ ॥ भारती, परमानन्दा, पर अपरके भेदवाली, सब प्रहरणोंसे युक्तकाम्या, कामेश्वरेश्वरी ॥ ९२ ॥

अचिंत्याऽचिंत्यमहिमा ५७० दुर्लेखा कनकप्रभा ॥ कूष्मांडी धनरत्नाढ्या सुगन्धा गंधदायिनी ॥ ९३ ॥ त्रिविक्रमपदोद्भूता धनुष्पाणिः शिरोहया ॥ सुदुर्लभा ५८० धनाध्यक्षा धन्या पिंगललोचना ॥ ९४ ॥

अचिन्त्या, अचिंत्यमहिमा ५७० दुर्लेखा, कनकप्रभा, कूष्माण्डी, धनरत्नोंसे युक्त, सुगन्धा, गन्धदायिनी ॥ ९३ ॥ त्रिविक्रमकेपटमें उद्भूतधनुष्पाणि शिरो हया, सुदुर्लभा ५८० धनाध्यक्षा, धन्या, पिंगलोचना ॥ ९४ ॥

भ्रांतिः प्रभावती दीप्तिः पंकजायतलोचना ॥ आद्या हृत्कमलोद्भूता परामाता ५९० रणप्रिया ॥ ९५ ॥ सत्क्रिया गिरिजा नित्यशुद्धा पुष्पनिरंतरा ॥ दुर्गा कात्यायनी चंडी चर्चिका शांतविग्रहा ६०० ॥ ९६ ॥

भ्रान्ति, प्रभावती, दीप्ति, पंकजायतलोचना, आद्या, हृदयकमलसे उत्पन्न, परामाता ५९० रणप्रिया ॥ ९५ ॥ सत्क्रिया, गिरिजा, नित्यशुद्धा, पुष्पनिरन्तरा, दुर्गा, कात्यायनी, चण्डी, चर्चिका, शांतविग्रहा ६०० ॥ ९६ ॥