अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
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हिरण्यवर्णा रजनी जगन्मंत्रप्रवर्तिका ॥ मंदराद्रि निवासा च शारदा स्वर्णमालिनी ॥ ९७ ॥ रत्नमाला रत्नगर्भा पृथ्बी विश्वप्रमाथिनी ६१० ॥ पद्मासना पद्मनिभा नित्यतुष्टामृतोद्भवा ॥ ९८ ॥
हिरण्यवर्णवाली, रजनी, जगत्के मन्त्र करनेवाली, मंदर पर्वतपर निवास करनेवाली, शारदा, स्वर्णमालिनी ॥ ९७ ॥ रत्नमाला, रत्नगर्भा, पृथ्बी, विश्वप्रमाथिनी ६१० पद्मासना, पद्मनिभा, नित्यतुष्टा अमृतोद्भवा ॥ ९८ ॥
धुन्वती दुष्प्रकंपा च सूर्यमाता दृषद्वती ॥ महेंद्रभगिनी माया ६२० वरेण्यावरदर्पिता ॥ ९९ ॥ कल्याणी कमला रामा पञ्चभूतवरप्रदा ॥ वाच्या वरेश्वरी नन्द्या दुर्जया ६३० दुरतिक्रमा ॥ १०० ॥
धुन्वती, दुष्प्रकंपा, सूर्यमाता, दृषद्वती, महेन्द्रभगिनी, माया ६२० वरेण्या, वरसे दर्पित ॥ ९९ ॥ कल्याणी, कमला, रामा, पञ्चभूतोंको वरणकी देनेवाली वाच्या, वरेश्वरी, नन्द्या, दुर्जया ६३० दुरतिक्रमा ॥ १०० ॥
कालरात्रिर्महावेगा वीरभद्रहितप्रिया ॥ भद्रकाली जगन्माता भक्तानां भद्रदायिनी ॥ १०१ ॥ कराला पिंगलाकारा नामवेदा ६४० महानदा ॥ तपस्विनी यशोदा च यथाध्वपरिवर्तिनी ॥ १०२ ॥
कालरात्रि, महावेगा, वीरभद्रहितप्रिया, भद्रकाली, जगत्की माता, भक्तोंको आनन्द देनेवाली ॥ १०१ ॥ कराला, पिंगलाकारवाली, नामवेदा ६४० महनदा, तपस्विनी, यशोदा, यथाध्वपरिवर्तिनी ॥ १०२ ॥
शंखिनी पद्मिनी सांख्या सांख्ययोगप्रवर्तिका ॥ चैत्री संवत्सरा ६५० रुद्रा जगत्संपूरणीन्द्रजा ॥ १०३ ॥ शुंभारिः खेचरी खस्था कंबुग्रीवा कलिप्रिया ॥ खरध्वजा खरारूढा ६६० परार्ध्या परमालिनी ॥ १०४ ॥
शंखिनी, पद्मिनी, सांख्ययोगकी प्रवृत्त करनेवाली, चैत्री, संवत्सरा ६५० रुद्रा जगत्संपूरणी-इन्द्रजा ॥ १०३ ॥ शंभारि, खेचरी, आकाशमें स्थित रहनेवाली, कम्बुग्रीवा, कलिप्रिया, खरध्वजा, खरारूढा, ६६० परार्ध्या, परमालिनी ॥ १०४ ॥
ऐश्वर्यरत्ननिलया विरक्ता गरुडासना ॥ जयंती हृद्गुहा रम्या सत्त्ववेगा गणाग्रणीः ॥ १०५ ॥ संकल्पसिद्धा ६७० साम्यस्था सर्वविज्ञानदायिनी ॥ कलिकल्मषहंत्री च गुह्योपनिषदुत्तमा ॥१०६॥