भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

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( १४६ ) अद्भुतरामायण [ पंचविंशति

ऐश्वर्यरत्नके स्थानवाली, विरक्त, गरुडके आसनवाली जयन्ती, हृद्गुहा, रम्यासत्त्वके वेगवाली, गणोंमें अग्रणी ॥ १०५ ॥ संकल्पसिद्धा ६७० साम्यमें स्थित, सब विज्ञानकी देनेवाली, कलिकलमंषकी नाश करनेवाली गुह्योपनिषद रूप, उत्तमा ॥ १०६ ॥

नित्यदृष्टिः स्मृतिर्व्याप्तिः पुष्टिस्तुष्टिः ६८० क्रियावती ॥ विश्वामरेश्वरेशाना भुक्तिर्मुक्तिः शिवामृता ॥ १०७ ॥ लोहिता सर्वमाता च भीषणा वनमालिनी ६९० ॥ अनन्तशयनाऽनाद्या नरनारायणोद्भवा ॥ १०८ ॥

नित्यदृष्टि, स्मृति, व्याप्ति, पुष्टि, तुष्टि ६८० क्रियावती, विश्वा, अमरपतियोंकी ईश्वरी, भुक्ति, मुक्ति, शिवा, अमृता ॥ १०७ ॥ लोहिता, सर्वमाता भीषणा, वनमालिनी ६९० अनन्तशयना, अनाद्या, नरनारायणोद्भवा ! १०८।

नृसिंही दैत्यमथिनी शंखचक्रगदाधरा ॥ संकर्षणसमुत्पत्तिरंबिकोपातसंश्रया ॥ १०९ ॥ महाज्वाला. महामूर्तिः ७०० सुमूर्तिः सर्वकामधुक् ॥ सुप्रभा सुतरां गौरी धर्मकामार्थमोक्षदा ॥ ११० ॥

नृसिंही, दैत्यमंथनी, शंख चक्र गदा धारिणी, संकर्षणसमुत्पत्ति, अम्बिका, समीपमें निवास करनेवाली ॥ १०९ ॥ महाज्वलाला, महामूर्ति ७००, सुमूर्ति सब काम देनेवाली, सुप्रभा, अत्यंत गौरी, धर्म काम अर्थ मोक्षकी देनेवाली ११०

भ्रूमध्यनिलयाऽपूर्वा प्रधानपुरुषा बली ॥ महाविभूतिदा ७१० मध्या सरोजनयनासना ॥ १११ ॥ अष्टादशभुजा नाटचा नीलोत्पलदलप्रभा ॥ सर्वशक्त्या समारूढा धर्माधर्मानुवर्जिता ॥ ११२ ॥

भौँके मध्यमें स्थानवाली, अपूर्वा, प्रधान पुरुषा, वली महाविभूतिकी देनेवाली ७१०, मध्या, कमलनेत्रासना ॥ १११ ॥ अठारह भुजावाली, नाटचा-, नीले कमलके समान कांतिवाली, सब शक्तिद्वारा समारूढ, धर्म अधर्मसे वर्जित ॥ ११२ ॥

वैराग्यज्ञाननिरता निरालोका ७२० निरेंद्रिया ॥ विचित्रगहना धीरा शाश्वतस्थानवासिनी ॥ ११३ ॥ स्थानेश्वरी निरानन्दा त्रिशूलवरधारिणी ॥ अशेषदेवतामूर्तिर्देवतापरदेवता ७३० । ११४ ।

वैराग्य ज्ञानमें निरत, निरालोका ७२०, निरिन्द्रिया, विचित्रगहना, धीरजवाली, शाश्वतस्थानमें निवास करनेवाली ॥११३॥ स्थानेश्वरी, निरानन्दा,

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