अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसर्ग हिन्दीटीकासहित ( १४७ )
त्रिशूलश्रेष्ठ धारण करनेवाली, संपूर्ण देवताओंकी मूर्ति, देवता, परदेवता, स्वरूप ७३० ॥ ११४ ॥
गणात्मिका गिरेः पुत्री निशुम्भविनिपातिनी ॥ अवर्णा वर्णरहिता निर्वाणा वीजसम्भवा ॥ ११५ ॥ अनन्तवर्णाऽनन्यस्था शंकरी ७४० शान्तमानसा ॥ अगोत्रा गोमती गोप्त्री गुह्यरूपा गुणान्तरा । ११६ ।
गणात्मिक पर्वतराजपुत्री निशुम्भकी नाश करनेवाली, अवर्णा, वर्णसे रहित, निर्वाणा, बीजसम्भवा ॥ ११५ ॥ अनन्तवर्णा, अनन्यमें स्थितिवाली, शंकरी ७४०, शांत मनवाली अगोत्रा, गोमती, रक्षा करनेवाली, गुह्यरूपा, गुणान्तरा ॥ ११६ ॥
गोश्रीर्गव्यप्रिया गौरी गणेश्वरनमस्कृता ॥ सत्यमात्रा ७५० सत्यसन्धा त्रिसन्ध्या संधिवर्जिता ॥ ११७ ॥ सर्ववादाश्रया सांख्या सांख्ययोगसमुद्भवा ॥ असंख्येयाऽप्रमेयाख्या शून्या शुद्धकुलोद्भवा ७६० ॥ ११८ ॥
गोश्री, गौके पदार्थ घृत दुग्धकी प्यार करनेवाली गौरी, गणेश्वरसे नमस्कृत सत्यमात्रावाली ७५० सत्यसन्धा, तीनों सन्ध्या और संधिसे रहित ॥ ११७ ॥ सर्ववादके आश्रयवाली, सांख्ययुक्त, सांख्य, योग द्वारा प्रगट होनेवाली, अनन्ता, प्रमाके अयोग्य, शून्या, शुद्धकुलमें प्रगट होनेवाली ७९० ॥ ११८ ॥
बिंदुनादसमुत्पत्तिः शंभुवामा शशिप्रभा ॥ विसङ्गा भेदरहिता मनोज्ञा मधुसूदनी ॥ ११९ ॥ महाश्रीः श्रीसमुत्पत्ति ७७० स्तमःपारे प्रतिष्ठिता ॥ त्रितत्त्वमाता त्रिविधा सुसूक्ष्मपद संश्रया ॥ १२० ॥
विन्दुनादसे प्रगट होनेवाली, शम्भुकी वामा, चन्द्रमाके समान कांतिवाली, संगवर्जित, भेदरहित, मनोहरा, मधुसूदनी ॥ ११९ ॥ महाश्री, लक्ष्मीकी प्रगट करनेवाली, ७७० तमके परपारमें स्थिति करनेवाली, तीन तत्वोंकी माता, त्रिविधा, सूक्ष्मपदमें स्थिति करनेवाली ॥ १२० ॥
शांत्यतीता मलातीता निर्विकारा निराश्रया ॥ शिवाख्या चित्र निलया ७८० शिवज्ञानस्वरूपिणी ॥ १२१ ॥ दैत्यदानवनिर्मात्री काश्यपी कालकर्णिका ॥ शास्त्रयोनिः क्रियामूर्तिश्चतुर्वर्गप्रद- शिका ॥ १२२ ॥