भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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( १४८ ) अद्भुतरामायण [ पंचविंशति-

शान्त्यतीता, मलसे परे, निर्विकारा, निराश्रया, शिवा, चित्रनिलया ७८० शिवके ज्ञानकी स्वरूपवाली ॥ १२१ ॥ दैत्यदानवकी निर्माण करनेवाली, काश्यपी, कालकर्णिका, शास्त्रयोनि, त्रियाकी मूर्ति, चार वर्ग (धर्म अर्थ काम मोक्ष) की दिखानेवाली ॥ १२२ ॥

नारायणी नवोद्भूता कौमुदी ७९० लिंगधारिणी ॥ कामुकी ललिता तारा परापरविभूतिदा ॥ १२३ ॥ परांजततामहिमा वडवा वामलोचना ॥ सुभद्रा देवकी ८०० सीता वेदवेदांगपारगा । १२४ ।

नारायणी, नवीन उद्भववाली, कौमुदी ७९० लिंगधारिणी, कामुकी, ललिता, तारा, परापरके ऐश्वर्यकी देनेवाली ॥ १२३ ॥ महामहिमावाली, वडवा, वामलोचना, सुभद्रा, देवकी ८०० सीता वेदवेदांगकी पार जानेवाली ॥ १२४ ॥

मनस्विनी मन्युमाता महामन्युसमुद्भवा ॥ अमृत्युरमृतास्वादा पुरुहूता पुरुप्लुता ॥ १२५ ॥ अशोच्या ८१० भिन्नविषया हिरण्य-रजतप्रिया ॥ हिरण्या राजती हैमी हेमाभरण भूषिता ॥ १२६ ॥

मनस्विनी, मन्युमाता, महाक्रोधमें होनेवाली, मृत्यु रहित, अमृतके अस्वाद वाली, पुरुहूता, पुरुप्लुप्ता ॥ १२५ ॥ शोचरहिता ८१०, भिन्न विषयवाली सोने चांदीको प्यार करनेवाली, सुवर्ण चांदी हेमरूपवाली, सुवर्णके गहनोंसे युक्त ॥ १२६ ॥

विभ्राजमाना दुर्ज्ञेया ज्योतिष्टोमफलप्रदा ॥ महानिद्रा ८२० समुद्भूतिर्बलीन्द्रा सत्यदेवता ॥ १२७ ॥ दीर्घा ककुद्मिनी विद्या शांतिदा शांतिवर्द्धिनी ॥ लक्ष्म्यादिशक्तिजननी शक्तिचक्रप्रव-र्तिका ॥ १२८ ॥

विशेषकर शोभायमान, जाननेमें न आने-ज्योतिष्टोम यज्ञका फल देने-वाली, महानिद्रा । ८२० समुद्भववाली, बलियोंमें श्रेष्ठ सत्यदेवतायुक्त ॥ १२७ ॥ दीर्घिका, ककुद्मिनी विद्या शांति देनेवाली, शांतिकी बढानेवाली, लक्ष्मी आदि शक्तिकी उत्पन्न करनेवाली, शक्तिचक्रको प्रवृत्त करनेवाली १२८

त्रिशक्तिजननी ८३० जन्या षडूर्मिपरिवर्जिता ॥ स्वाहा च कर्मकरणी युगांतदलनात्मिका ॥ १२९ ॥ संकर्षणा जगद्धात्री कामयोनिः किरीटिनी ॥ ऐंद्री ८४० त्रैलोक्यनमिता वैष्णवी परमेश्वरी ॥ १३० ॥