अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
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तीनों शक्ति उत्पन्न कर्त्री ८३० जन्या, कामक्रोधादि छः ऊर्मियोंसे वर्जित, स्वाहा, कर्मकी करनेवाली, युगान्तदलन करनेवाली ॥ १२९ ॥ संकर्षण करनेवाली, जगतकी माता, कामयोनि, किरीट धारण किये, ऐन्द्रीशक्ति ८४० त्रिलोकीसे नमस्कृत, वैष्णवी, परमेश्वरी ॥ १३० ॥
प्रद्युम्नदयिता दांता युग्मदृष्टिस्त्रिलोचना ॥ महोत्कटा हंसगतिः प्रचण्डा ८५० चण्डविक्रमा ॥ १३१ ॥ वृषावेशा वियन्मात्रा विन्ध्यपर्वतवासिनी ॥ हिमवन्मेरुनिलया कैलासगिरिवासिनी ॥ १३२ ॥
प्रद्युम्नप्रिया, दान्ता, युग्मदृष्टिवाली त्रिलोचना, महाउत्कटा, हंसगामिनी, प्रचण्डा ८५० तीक्ष्ण पराक्रमवाली ॥ १३१ ॥ वृषमें आवेशवाली, आकाशकी मात्रा, विन्ध्यपर्वतमें निवास करनेवाली हिमालय और मेरुमें निवास करनेवाली, तथा कैलासमें रहनेवाली ॥ १३२ ॥
चाणूरहन्त्री तनया नीतिज्ञा कामरूपिणी ८६० ॥ वेदविद्या व्रतरता धर्मशीलाऽनिलाशना ॥ १३३ ॥ अयोध्यानिलया वीरा महाकालसमुद्भवा ॥ विद्याधरक्रिया सिद्धा विद्याधरनिराकृतिः ॥ १३४ ॥
चाणूरकी मारनेवाली, तनया नीतिकी जाननेवाली कामरूपिणी ८६०, वेदविद्याव्रतमें रत, धर्मशीला, अनिलका भोजन करनेवाली ॥ १३३ ॥ अयोध्या में निवास करनेवाली, वीरा महाकालकी प्रकट करनेवाली, विद्याधरप्रिया, विद्याधरकी निराकृत करनेवाली ॥ १३४ ॥
आप्यायन्ती ८७० वहंती च पावनी पोषणी खिला ॥ मातृकौ मन्मथोद्भूता वारिजा वाहनप्रिया ॥ १३५ ॥ करीषिणी स्वधा वाणी ८८० वीणावादनतत्परा ॥ सेविता सेविका सेवा सिनीवाली गरुत्मती ॥ १३६ ॥ अरुंधती हिरण्याक्षी मणिदा श्रीवसुप्रदा ८९० ॥ वसुमती वसोर्धारा वसुंधरा समुद्भवा ॥ १३७ ॥ वरारोहा वराहा च वपुःसङ्गसमुद्भवा ॥ श्रीफली श्रीमती श्रीशा श्रीनिवासा ९०० हरिप्रिया ॥ १३८ ॥
तृप्ति करनेवाली ८७० वहन करनेवाली, पावना, पोषणी, खिला, मातृका, मन्मथसे उद्भूत, जलसे प्रगट होनेवाली, वाहन प्रिया ॥ १३५ ॥ करीषिणी, स्वधा, वाणी ८८०, वीणा बजानेमें तत्पर, सेविता, सेविका, सेवा, हनीवाली (अमारूप), गरुत्मती ॥ १३६ ॥ अरुन्धती, हिरण्याक्षी, मणिदाता, श्री,