अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
पृष्ठ 157, कुल 173 में से
संदर्भ में पढ़ें(१५०) अद्भुतरामायण [पंचविंशति-
वसु, (धन) की देनेवाली ८९० वसुमती, वसोघरा, वसुन्धरासे प्रगट होनेवाली ।। १३७ ।। सुमुखी श्रेष्ठ योग्यतायुक्त, शरीरके संगमसे होनेवाली, श्रीफली, श्रीमती, श्रीशा, श्रीनिवासां ९०० हरिकी प्रिया १३८।।
श्रीधरी श्रीकरी कंपा श्रीधरा ईशवीरणी ।। अनन्तदृष्टिरक्षुद्रा धात्रीशा धनदप्रिया ९१० ।। १३९ ।। निहंत्री दैत्यसिंहानां सिंहिका सिंहवाहिनी ।। सुसेना चन्द्रनिलया सुकीर्तिश्छिन्नसंशया ।। १४० ।।
श्रीधरी, श्री करनेवाली, कम्पा, श्रीधारणकरनेवालि, ईशवीरणी, अनन्त दृष्टि, क्षुद्रतारहित, धात्रीशा, धनदकी प्रिया ९१० ।। १३९ ।। महादैत्योंकी मारनेवाली, सिंहिका रूप, सिंहपर चढनेवाली, सुन्दर सेनावाली, चन्द्रमें स्थानवाली, सुंदर कीर्तिवाली, सन्देहरहित ।। १४० ।।
बलज्ञा बलदा वामा ९२० लेलिहानाऽमृताश्रवा ।। नित्योदिता स्वयंज्योतिरुत्सुकामृतजीविनी ।। १४१ ।। वज्रदंष्ट्रा वज्रजिह्वा वैदेही वज्रविग्रहा ९३० ।। मंगल्या मङ्गला माला मलिना मलहारिणी ।। १४२ ।।
बलकी जाननेवाली, देनेवाली, वामा ९२० जिह्वा चाटनेवाली, अमृत प्रकट करनेवाली, नित्यं सद्यरूप, स्वयंज्योति, उत्सुका, अमृतजीवनी ।। १४१ ।। वज्रके समान डाढोंवाली, वज्रजिह्वावाली वैदेही, वज्रके समान शरीरवाली, ९३०, मंगलरूपिणी मंगला, माला, मलिना, मलकी हरनेवाली ।। १४२ ।।
गन्धर्वी गारुडी चान्द्री कंबलाश्वतरप्रिया ।। सौदामनी ९४० जनानन्दा भ्रुकुटीकुटिलानना ।। १४३ ।। कर्णिकारकरा कक्षा कंसप्राणापहारिणी ।। युगंधरा युगावर्त्ता त्रिसन्ध्याहर्षवर्धिणी ।१४४
गान्धर्वी, गारुडी, चान्द्री, कम्बल, अश्वतरनामक नागोंकी प्रिया ९४०, जनोंको आनन्द देनेवाली, भ्रुकुटीसे कुटिलमुखवाली ।। १४३ ।। कर्णिकारसे करवाली, कक्षा, कंसके प्राण हरनेवाली, युगन्धरा, युगका आवर्तन करनेवाली, त्रिसन्ध्यारूप, हर्षकी बढानेवाली ।। १४४ ।।
प्रत्यक्षदेवता ९५० दिव्या दिव्यगन्धा दिवापरा ।। शक्रासनगता शाक्री साध्वी नारी शवासना ।। १४५ ।। इष्टा विशिष्टा ९६० शिष्टेष्टा शिष्टाशिष्टप्रपूजिता ।। शतरूपा शतावत्र्ता विनीता सुरभिः सुरा ।। १४६ ।।