अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)
Adbhut Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा
स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)
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सब देवताओंके इद्र, ब्रह्मज्ञानियोंके ब्रह्मा हो, सांख्योंमें कपिलदेव, रुद्रोंमें शंकर हो ।। १७ ।। आदित्योंमें उपेन्द्र और वसुओंमें पावक हो, वेदोंमें सामवेद और छंदोंमें गायत्री हो ।। १८ ।।
अध्यात्मविद्या विद्यानां गीतानां परमा गतिः ।। माया त्वं सर्वशक्तीनां कालः कलयतामपि ।। १९ ।। ॐकार सर्वगुह्यानां वर्णानां च द्विजोत्तमः ।। आश्रमाणां गृहस्थस्त्वमीश्वराणां महेश्वरः ।। २० ।।
विद्यामें अध्यात्मविद्या गतियोंमें परमगति सर्वशक्तियोंकी माया और कलित करनेवालोंमें काल तुम हो ।। १९ ।। सम्पूर्ण गुह्योंमें ॐकार तुम हो, वर्णोंमें ब्राह्मण, आश्रमोंमें, गृहस्थ, और ईश्वरोंमें महेश्वर तुम हो ।। २० ।।
पुंसां त्वमेव पुरुषः सर्वभूत हृदि स्थितः ।। सर्वोपनिषदां देवि गुह्योपनिषदुच्यसे ।। २१ ।। ईशानं चासि भूपानां युगानां कृतमेव च ।। आदित्यः सर्वमार्गाणां वाचां देवि सरस्वती ।। २२ ।।
पुरुषोंमें पुरुष सब भूतोंके हृदयमें तुम स्थित हो हे देवि ! सम्पूर्ण उपनिषदोंमें गुप्त उपनिषद् तुम हो ।। २१ ।। राजोंमें ईशता, और युगमें सतयुग तुम हो, अर्चिरादि सब मार्गोंमें आदित्य, वाणियोंमें सरस्वती देवी तुम हो ।। २२ ।।
त्वं लक्ष्मीश्चारुरूपाणां विष्णुर्मायाविनामपि ।। अरुंधती सतीनां त्वं सुपर्णः पततामसि ।। २३ ।। सूक्तानां पौरुषं सूक्तं ज्येष्ठं साम च सामसु ।। सावित्री ह्यसि जप्यनां यजुषां शतरुद्रियम् ।। २४ ।।
सुन्दर रूपवालोंमें लक्ष्मी मायावियोंमें विष्णु, सतियोंमें अरुन्धती, पक्षियोंमें गरुड तुम हो ।। २३ ।। वेदके सूक्तोंमें पुरुषसूक्त साममें ज्येष्ठ साम, जपोंमें सावित्री, और यजुओंमें शतरुद्रिय तुम हो ।। २४ ।।
पर्वतानां महामेरुरनन्तो भागिनामसि ।। सर्वेषां त्वं परंब्रह्म त्वन्मयं सर्वमेवहि ।। २५ ।। रूपं तवाशेषकलाविहीनमगोचरं निर्मलमेकरूपम् ।। अनादिमध्यान्तमनन्तमाद्यं नमामि सत्यं तमसः परस्तात् ।। २६ ।।
१ अर्चिरादिमार्गाणाम् ।
१ कलाः कलनानि परिच्छेदा इति यावत् । कल संख्याने । यावत्परिच्छेदशून्यमपरिच्छिन्नमिति यावत् ।